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*हर असफलता के बाद हमें दुगनी क्रियाशीलता के साथ आगे बढ़ना चाहिए, यह पुरुषार्थ की चुनौती है। जो एक ही ठोकर में निराश होकर बैठ गया, जिसका आशा दीप एक ही फूँक में बुझ गया, उस दुर्बल मन व्यक्ति ने न ही जीवन का स्वरूप समझा और न संसार का।* *यहाँ पग-पग पर संघर्ष करना होता है। कदम-कदम पर साहस, धैर्य और पुरुषार्थ की परीक्षा देनी होती है। जो उस मूल्य को चुकाने के लिए तैयार न हों, उन्हें सफलता जैसे वरदान की आशा भी नहीं करनी चाहिए।"* *!!!...मनुष्य कर्मोंसे नहीं बँधता, प्रत्युत कर्मोंमें वह जो आसक्ति और स्वार्थभाव रखता है, उनसे ही बँधता है...!!!*
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*हर असफलता के बाद हमें दुगनी क्रियाशीलता के साथ आगे बढ़ना चाहिए, यह पुरुषार्थ की चुनौती है। जो एक ही ठोकर में निराश होकर बैठ गया, जिसका आशा दीप एक ही फूँक में बुझ गया, उस दुर्बल मन व्यक्ति ने न ही जीवन का स्वरूप समझा और न संसार का।* *यहाँ पग-पग पर संघर्ष करना होता है। कदम-कदम पर साहस, धैर्य और पुरुषार्थ की परीक्षा देनी होती है। जो उस मूल्य को चुकाने के लिए तैयार न हों, उन्हें सफलता जैसे वरदान की आशा भी नहीं करनी चाहिए।"* *!!!...मनुष्य कर्मोंसे नहीं बँधता, प्रत्युत कर्मोंमें वह जो आसक्ति और स्वार्थभाव रखता है, उनसे ही बँधता है...!!!*
*आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की दिशा में बढ़ते कदम, #VocalForLocal का संकल्प लें हम।* *इस त्योहारों के सीजन में स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों को क्रय करें और उन्हें ग्लोबल बनाने में सहभागी बने। आपका यह योगदान करोड़ों व्यक्तियों को रोजगार उपलब्ध कराने के साथ भारत को भी आत्मनिर्भर बनाएगा।* *#VocalForLocal #AtmaNirbharBharat*
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नवरात्र का आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक-महत्व !! नवरात्र शब्द से नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध होता है। इस समय शक्ति के नव रूपों की उपासना की जाती है। 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक है। भारत के प्राचीन ऋषियों-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है, इसलिए दीपावली, होलिका, शिवरात्रि और नवरात्र आदि उत्सवों को रात में ही मनाने की परंपरा है। यदि रात्रि का कोई विशेष रहस्य न होता,... तो ऐसे उत्सवों को रात्रि न कह कर दिन ही कहा जाता। लेकिन नवरात्र के दिन, नवदिन नहीं कहे जाते। मनीषियों ने वर्ष में दो बार नवरात्रों का विधान बनाया है। विक्रम संवत के पहले दिन अर्थात चैत्र मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (पहली तिथि) से नौ दिन अर्थात नवमी तक। और इसी प्रकार ठीक छह मास बाद आश्विन मास शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से महानवमी अर्थात विजयादशमी के एक दिन पूर्व तक। परंतु सिद्धि और साधना की दृष्टि से शारदीय नवरात्रों को ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया है। इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग साधना आदि करते हैं। कुछ साधक इन रात्रियों में पूरी रात पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर आंतरिक त्राटक या बीज मंत्रों के जाप द्वारा विशेष सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। नवरात्रों में शक्ति के 51 पीठों पर भक्तों का समुदाय बड़े उत्साह से शक्ति की उपासना के लिए एकत्रित होता है। जो उपासक इन शक्ति पीठों पर नहीं पहुंच पाते, वे अपने निवास स्थल पर ही शक्ति का आह्वान करते हैं। आजकल अधिकांश उपासक शक्ति पूजा रात्रि में नहीं, पुरोहित को दिन में ही बुलाकर संपन्न करा देते हैं। सामान्य भक्त ही नहीं, पंडित और साधु-महात्मा भी अब नवरात्रों में पूरी रात जागना नहीं चाहते। न कोई आलस्य को त्यागना चाहता है। बहुत कम उपासक आलस्य को त्याग कर आत्मशक्ति, मानसिक शक्ति और यौगिक शक्ति की प्राप्ति के लिए रात्रि के समय का उपयोग करते देखे जाते हैं।मनीषियों ने रात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने और समझाने का प्रयत्न किया। रात्रि में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं। आधुनिक विज्ञान भी इस बात से सहमत है। हमारे ऋषि - मुनि आज से कितने ही हजारों वर्ष पूर्व ही प्रकृति के इन वैज्ञानिक रहस्यों को जान चुके थे। दिन में आवाज दी जाए तो वह दूर तक नहीं जाएगी , किंतु रात्रि को आवाज दी जाए तो वह बहुत दूर तक जाती है। इसके पीछे दिन के कोलाहल के अलावा एक वैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें आवाज की तरंगों और रेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं। रेडियो इस बात का जीता - जागता उदाहरण है। कम शक्ति के रेडियो स्टेशनों को दिन में पकड़ना अर्थात सुनना मुश्किल होता है , जबकि सूर्यास्त के बाद छोटे से छोटा रेडियो स्टेशन भी आसानी से सुना जा सकता है। वैज्ञानिक सिद्धांत → वैज्ञानिक सिद्धांत यह है कि सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं, उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती है। इसीलिए ऋषि - मुनियों ने रात्रि का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक बताया है। मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज के कंपन से दूर - दूर तक वातावरण कीटाणुओं से रहित हो जाता है। यह रात्रि का वैज्ञानिक रहस्य है। जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में संकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपने शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं , उनकी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि , उनके शुभ संकल्प के अनुसार उचित समय और ठीक विधि के अनुसार करने पर अवश्य होती है। नवरात्र या नवरात्रि →संस्कृत व्याकरण के अनुसार नवरात्रि कहना त्रुटिपूर्ण हैं। नौ रात्रियों का समाहार, समूह होने के कारण से द्वन्द समास होने के कारण यह शब्द पुलिंग रूप 'नवरात्र' में ही शुध्द है। नवरात्र क्या है → पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा के काल में एक साल की चार संधियाँ हैं। उनमें मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियाँ बढ़ती हैं, अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए, शरीर को शुध्द रखने के लिए और तनमन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम 'नवरात्र' है। नौ दिन या रात → अमावस्या की रात से अष्टमी तक या पड़वा से नवमी की दोपहर तक व्रत नियम चलने से नौ रात यानी 'नवरात्र' नाम सार्थक है। यहाँ रात गिनते हैं, इसलिए नवरात्र यानि नौ रातों का समूह कहा जाता है।रूपक के द्वारा हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है। इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है। इन मुख्य इन्द्रियों के अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में, शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नौ द्वारों की शुध्दि का पर्व नौ दिन मनाया जाता है। इनको व्यक्तिगत रूप से महत्व देने के लिए नौ दिन नौ दुर्गाओं के लिए कहे जाते हैं। शरीर को सुचारू रखने के लिए विरेचन, सफाई या शुध्दि प्रतिदिन तो हम करते ही हैं किन्तु अंग-प्रत्यंगों की पूरी तरह से भीतरी सफाई करने के लिए हर छ: माह के अंतर से सफाई अभियान चलाया जाता है। सात्विक आहार के व्रत का पालन करने से शरीर की शुध्दि, साफ सुथरे शरीर में शुध्द बुद्धि, उत्तम विचारों से ही उत्तम कर्म, कर्मों से सच्चरित्रता और क्रमश: मन शुध्द होता है। स्वच्छ मन मंदिर में ही तो ईश्वर की शक्ति का स्थायी निवास होता है। नौ देवियाँ / नव देवी →नौ दिन यानि हिन्दी माह चैत्र और आश्विन के शुक्ल पक्ष की पड़वा यानि पहली तिथि से नौवी तिथि तक प्रत्येक दिन की एक देवी मतलब नौ द्वार वाले दुर्ग के भीतर रहने वाली जीवनी शक्ति रूपी दुर्गा के नौ रूप हैं : 1. शैलपुत्री 2. ब्रह्मचारिणी 3. चंद्रघंटा 4. कूष्माण्डा 5. स्कन्दमाता 6. कात्यायनी 7. कालरात्रि 8. महागौरी 9. सिध्दीदात्री इनका नौ जड़ी बूटी या ख़ास व्रत की चीजों से भी सम्बंध है, जिन्हे नवरात्र के व्रत में प्रयोग किया जाता है : 1. कुट्टू (शैलान्न) 2. दूध-दही, (ब्रह्मचारिणी) 3. चौलाई (चंद्रघंटा) 4. पेठा (कूष्माण्डा) 5. श्यामक चावल (स्कन्दमाता) 6. हरी तरकारी (कात्यायनी) 7. काली मिर्च व तुलसी (कालरात्रि) 8. साबूदाना (महागौरी) 9. आंवला(सिध्दीदात्री) अष्टमी या नवमी → यह कुल परम्परा के अनुसार तय किया जाता है। भविष्योत्तर पुराण में और देवी भावगत के अनुसार, बेटों वाले परिवार में या पुत्र की चाहना वाले परिवार वालों को नवमी में व्रत खोलना चाहिए। वैसे अष्टमी, नवमी और दशहरे के चार दिन बाद की चौदस, इन तीनों की महत्ता 'शाक्त-शास्त्रों' में कही गई है।लेकिन हमारे बेतिया या बिहार,नेपाल अथवा यूं कहें कि उत्तर भारत में दशमी को पारण करने का विधा्न ग्राह्य है!
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महात्मा के 150 साल
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*मोहनदास करमचंद गांधी के 150 साल .. भोजपुरी में और मेरे मन में गाँधी ... भोजपुरी का यह गीत भी बहुत मशहूर हुआ, जिसके बोल थे... मोरे चरखा के टूटे न तार, चरखवा चालू रहे. गान्ही बाबा बनलै दुलहवा, अरे दुल्हिन बनी सरकार, चरखवा चालू रहे...." शादी विवाह के मौके पर सुना था तब गांधी चरखे से उठ के नोट पर आ गए थे.. यह प्रतीक था या कुछ और खैर.... आज बापू का 150 वा जन्म दिन है। विश्व में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों और समर्थकों की भाँति, जिनमें एक मैं भी शामिल हूँ । आज के दिन को आत्म मंथन का दिन मानता हूं गाँधी का होना आप इससे जान सकते हो की 1- #आइन्स्टाइन ( E=mc2 )ने यह कहा था कि हमारी आने वाली पीढ़ियाँ बमुश्किल यह विश्वास कर पायेंगी कि हाड़ माँस का एक ऐसा आदमी कभी इस धरती पर चलता फिरता था। 2-अमेरिकी अश्वेत नेता मार्टिन #लूथर किंग जूनियर यह कहा करते थे कि दुनियाँ के बाक़ी लोगों के लिए भारत पर्यटन स्थल की भाँति होगा परन्तु मेरे लिए यह एक तीर्थाटन के समान है क्योंकि यह महात्मा गांधी की जन्मस्थली है। हम सामान्य व्यक्तियों का जन्मदिन मनाते हैं परन्तु महापुरुषों की ज...
विश्व की सबसे समृद्ध भाषा
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*क्या आप जानते है विश्व की सबसे ज्यादा सम्रद्ध भाषा कौनसी है.....* अंग्रेजी में 'THE QUICK BROWN FOX JUMPS OVER A LAZY DOG' एक प्रसिद्ध वाक्य है। जिसमें अंग्रेजी वर्णमाला के सभी अक्षर समाहित कर लिए गए, मज़ेदार बात यह है की अंग्रेज़ी वर्णमाला में कुल 26 अक्षर ही उप्लब्ध हैं जबकि इस वाक्य में 33 अक्षरों का प्रयोग किया गया जिसमे चार बार O और A, E, U तथा R अक्षर का प्रयोग क्रमशः 2 बार किया गया है। इसके अलावा इस वाक्य में अक्षरों का क्रम भी सही नहीं है। जहां वाक्य T से शुरु होता है वहीं G से खत्म हो रहा है। अब ज़रा संस्कृत के इस श्लोक को पढिये।- *क:खगीघाङ्चिच्छौजाझाञ्ज्ञोSटौठीडढण:।* *तथोदधीन पफर्बाभीर्मयोSरिल्वाशिषां सह।।* अर्थात: पक्षियों का प्रेम, शुद्ध बुद्धि का, दूसरे का बल अपहरण करने में पारंगत, शत्रु-संहारकों में अग्रणी, मन से निश्चल तथा निडर और महासागर का सर्जन करनार कौन? राजा मय! जिसको शत्रुओं के भी आशीर्वाद मिले हैं। श्लोक को ध्यान से पढ़ने पर आप पाते हैं की संस्कृत वर्णमाला के *सभी 33 व्यंजन इस श्लोक में दिखाये दे रहे हैं वो भी क्रमानुसार*। यह खूबसूरती केवल और केवल सं...
संकट का सामना करें, घबड़ाए नही
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संकट का सामना करें घबरायें नहीं* मनुष्य में एक छोटी सी समस्या है, वो कभी स्वयं की निंदा सुन नहीं पाता। यदि कोई उसके विषय में बुरा कहे, सह नहीं पाता। सदैव भयभीत रहता है कि जो चार लोग हैं, कहीं मेरे विषय में बुरा न सोचें और यदि उसे पता लग जाए कि कोई उसकी पीठ पीछे उसकी बुराई कर रहा है, तो दुःखी हो जाता है। अब क्या इस कारण से स्वयं को दुखी कर लेना क्या उचित है ? कदापि नहीं। क्योंकि सबसे पहली बात जो आपको स्मरण रखनी है। यदि कोई पीठ पीछे आपकी बुराई करता है, वो आपसे दो कदम पीछे है, है न ? जो आपके बारे में आपसे सारी बातें कर सकता है। यदि ऐसा नहीं है, यदि वो सत्य कह रहे हैं, तो सर्वप्रथम अपनी भूलों को समझें। उस सत्य को समझें और निकाल फेंकें इन अवगुणों को और फिर देखें आप उनसे दो कदम और आगे बढ़ जाएँगे। क्योंकि ये जीवनरथ आगे देखकर चलाया जाता है, पीछे देखकर नहीं। तो ये पीछे देखना छोड़ दीजिये। जो वर्तमान है इसे देखिये इसे जीयें। जो आपका लक्ष्य है उसे साधिये। मनुष्य जो है ये भूलों का पिटारा है। मनुष्य जो है, गलतियों का पुतला है और ये सत्य है। भूल भला किससे नहीं होती ? हर एक से होती है और एक न...
सनातन
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एक मित्र ने मुझसे कहा- वैदिक काल से लेकर अब तक तुम्हारे हिन्दू धर्म के अंदर इतने सारे परिवर्तन हो चुके हैं कि अब ये पता करना लगभग असंभव है कि इसका मूल स्वरूप क्या रहा होगा। आरंभिक और मूल शिक्षाऐं क्या रही होंगी। इसलिए तुम ये मान लो कि तुम्हारे धर्म के अंदर इतनी तब्दीली आ चुकी है कि अब उसमें कुछ भी ऐसा नहीं खोजा जा सकता जो शुरू से लेकर आज तक वही है। उसने फिर व्यंग्य के लहजे में कहा- मुझे तो लगता है कि तुम लोग खुद ही कंफ्यूज हो गये होगे कि क्या मान रहे हैं और क्या मानना था। मैंने उस वक़्त उससे कुछ भी नहीं कहा और उसे उत्तर देने के लिए सही अवसर की प्रतीक्षा करने लगा। एक दिन उसके साथ उसके यहाँ बैठा था। टीवी पर 'बाहुबली' फिल्म आ रही था। फिल्म के उस दृश्य में 'कालकेय' के साथ युद्ध में पराजित होकर भागती अपनी सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए 'बाहुबली' कहता है- “क्या है मृत्यु? हमारे आत्मबल से शत्रु का बल ज्यादा है ये सोचना है मृत्यु ! रणभूमि में शत्रु से भयभीत होकर जीवित रहना है मृत्यु ! जिस नीच ने हमारी माँ का अपमान किया है वो हमारी आंखों के सामने अट्टहास कर रहा है, उसका सर...
संस्कृत का चमत्कार
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संस्कृत भाषा का चमत्कार देखेंगे ...? आइए देखिए अहिः = सर्पः अहिरिपुः = गरुडः अहिरिपुपतिः = विष्णुः अहिरिपुपतिकान्ता = लक्ष्मीः अहिरिपुपतिकान्तातातः = सागरः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धः = रामः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ता = सीता अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरः = रावणः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयः = मेघनादः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्ता = लक्ष्मणः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदाता = हनुमान् अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजः = अर्जुनः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखा = श्रीकृष्णः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतः = प्रद्युम्नः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतः = अनिरुद्धः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्ता = उषा अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्तातातः = बाणासुरः अहिरिपुपतिकान्तातातसम्बद्धकान्ताहरतनयनिहन्तृप्राणदातृध्वजसखिसुतसुतकान्तातातसम्पूज्...
आत्मसुधार
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3️⃣1️⃣❗0️⃣8️⃣❗2️⃣0️⃣2️⃣1️⃣ *आत्मसुधार* *एक बार एक व्यक्ति दुर्गम पहाड़ पर चढ़ा, वहाँ पर उसे एक महिला दिखीं, वह व्यक्ति बहुत अचंभित हुआ, उसने जिज्ञासा व्यक्त की कि "वे इस निर्जन स्थान पर क्या कर रही हैं"।* उन महिला का उत्तर था" मुझे अत्यधिक काम हैं"। इस पर वह व्यक्ति बोला "आपको किस प्रकार का काम है, क्योंकि मुझे तो यहाँ आपके आस-पास कोई दिखाई नहीं दे रहा"। *महिला का उत्तर था" मुझे दो बाज़ों को और दो चीलों को प्रशिक्षण देना है, दो खरगोशों को आश्वासन देना है, एक सर्प को अनुशासित करना है और एक सिंह को वश में करना है।* व्यक्ति बोला "पर वे सब हैं कहाँ, मुझे तो इनमें से कोई नहीं दिख रहा"। महिला ने कहा "ये सब मेरे ही भीतर हैं।" *दो बाज़ जो* हर उस चीज पर गौर करते हैं जो भी मुझे मिलीं, अच्छी या बुरी। मुझे उन पर काम करना होगा, ताकि वे सिर्फ अच्छा ही देखें ---- *ये हैं मेरी आँखें।* *दो चील जो* अपने पंजों से सिर्फ चोट और क्षति पहुंचाते हैं, उन्हें प्रशिक्षित करना होगा, चोट न पहुंचाने के लिए ----- *वे हैं मेरे हाँथ।* *खरगोश यहाँ...
जन्माष्टमी
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*अनंतकोटी ब्रह्मांड नायक सच्चिदानंद सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्णके अवतरण दिवस (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) की आप सभी को बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं!* 🙏🙏💐💐🎊🎊🎊🎉🎉🥳🥳 *जय राधेगोविंद!* स्वमं परात्पर भगवान श्रीकृष्ण अपने जन्मके संबंध में श्रीअर्जुनजी को गीताजी में बतला रहे हैं.. ************************************************* अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन् । प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया ।। (गीता/4/6) यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ (4/7) परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ (4/8) जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्वतः। त्यक्तवा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन॥ (4/9) अर्थ-- (हे अर्जुन!) मैं अजन्मा और अविनाशीस्वरूप होते हुए भी तथा समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योगमाया से प्रकट होता हूँ॥6॥ हे भारत! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ अर्थात साक...
हर बुखार कोरोना नही
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हर बुखार कोरोना नहीं बरसात के मौसम में जहां पेड़ हरे-भरे हो जाते हैं, वहीं इस मौसम में मौसमी बुखार भी खूब होता है। यह मौसमी बुखार पहले भी होता था, लेकिन अब बुखार के मायने बदल गए हैं। शरीर गर्म होते ही कोरोना का डर सताने लगता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या हर बुखार कोरोना होता है? अगर बुखार हो जाए तो क्या करना चाहिए? ऐसे ही सवालों के जवाब एक्सपर्ट्स से पूछकर बता रहे हैं लोकेश के. भारती बुखार कोई बीमारी नहीं, लेकिन यह कई बीमारियों का शुरुआती लक्षण जरूर है। बुखार यह बताता है कि शरीर को कोई परेशानी है जिसका हल खोजना जरूरी है। कई बार परेशानी जब बड़ी होती है तो बुखार भी बढ़ने लगता है। ज्यादा तेज बुखार होने पर हमारे शरीर में मौजूद हॉर्मोन्स और एंजाइम सही तरीके से काम नहीं कर पाते। दिमाग भी ठीक से काम नहीं करता। इसलिए डॉक्टर पहले बुखार कम करने की दवा देते हैं। इसके बाद इंफेक्शन का पता लगाने के लिए जांच लिखते हैं। बुखार होने की कोई न कोई वजह होती है। बिना वजह बुखार नहीं हो सकता। वजह जितनी बड़ी होगी यानी बीमारी जितनी बड़ी होगी, बुखार की जिद भी वैसी ही होगी। मान लें किसी को सामान्...
भारतीय संस्कृति पर्वों एवं त्योहारों की संस्कृति है । इनका उद्देश्य मानवीय संबंधों का विकास एवं उदात्त भावनाओं की सार्थक अभिव्यक्ति है । इन पर्वों में श्रावणी या रक्षाबंधन का महत्वपूर्ण स्थान है । वैदिक युग से प्रचलित यह पर्व शिक्षा, स्वास्थ्य, सौंदर्य तथा सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना एवं पुनर्स्मरण कराता है । इसे प्रायश्चित एवं जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए संकल्प पर्व के रूप में मनाया जाता है । यही जीवन की सुख एवं समृद्ध का आधार है ।पौराणिक युग, मध्यकाल और वर्तमान समय में रक्षाबंधन विभिन्न रूपों में दिखाई देता है, परंतु इसकी निरंतरता एवं भावना में कहीं व्यक्तिक्रम नहीं हुआ है । हाँ, कुछ विसंगतियाँ ज़रूर आयी है । समाज के बदलते प्रतिमान व परिवेश के बावजूद आज भी प्रेम की मिठास से सराबोर यह पर्व जीवन की पवित्रता और रक्षा का प्रतीक बना हुआ है ।
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तालिबान का उदय
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तालिबान ने युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दिया है। बिना किसी खास विरोध के तालिबान के लड़ाके काबुल में प्रविष्ट हो गये और राष्ट्रपति सहित पूरा अफगान प्रशासन काबुल से भाग खड़ा हुआ। करीब 20 साल बाद अब काबुल पर तालिबान का दोबारा कब्जा हो गया है। लेकिन ये तालिबान हैं कौन? कहां से पैदा हुए? इनकी विचारधारा किस इस्लाम से प्रेरित है? तालिब का अर्थ होता है विद्यार्थी। तालिबान का अर्थ हुआ विद्यार्थियों का समूह। आज अफगानिस्तान में "विद्यार्थियों के जिस समूह" के कारण तालिबान चर्चा में हैं इनका जन्म पाकिस्तान के एक मदरसे दारुल उलूम हक्कानिया में हुआ था। पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा मुजाहिद (मजहबी योद्धा) तैयार करने का आदेश और डॉलर मिला था जिसे पूरा करने के लिए पाकिस्तानी फौज ने दारुल उलूम हक्कानिया को चुना। इसी मदरसे से एक तालिब पढकर निकला था जिसका नाम था मुल्ला उमर जो उस समय कराची में कुरान पढाता था। दारुल उलूम हक्कानिया के उस समय प्रिंसिपिल थे मौलाना समी उल हक उर्फ मौलाना सैंडविच। मौलाना समी उल हक मुल्ला उमर से बहुत प्रभावित थे। उन्हें जब पाक फौज का आदेश मिला कि अफगानिस्तान में सो...
जीवन संघर्ष में योग्यतम की विजय
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🔥♻️🔥♻️🔥♻️🔥♻️🔥♻️🔥 *फल वही वृक्ष देता है जो हर मौसम को सहन कर के पनपता है,* *इंसान जीवन में अगर आप को कभी कष्ट आते है, कभी सुख मिलता है तो उनको सब तरह से सहना सीखो, तभी आप जीवन को बढ़ा पाएंगे,अगर सब सुख मिलते रहेंगे तो इंसान कमजोर हो जायेगा, वो एक समय ऐसा होगा कि थोड़ा सा कष्ट उसे गिरा देगा,* *बच्चा जब पैदा होता है तब दाई या नर्स उसे पीठ पर थपकी मरती है, थोड़ा बड़ा होता है तो मसाज मालिश होती है, कारण कि उसके शरीर के सभी अंग मजबूत बने, सुख दुःख किसी भी व्यक्ति को मजबूत बनाता है जो दुःख या विषम परिस्थितियों को सहन करना सीख गया वो निश्चित कामयाब होगा,* *कुछ बुरा होता है हमारे सोच के अनुरूप नहीं होता तो निराश मत होइए, ना खुद से विमुख होना चाहिए, कितनी भी विषम परिस्थिति में हर किसी बात का सामना करते रहना चाहिए, इस से आप के प्रति लोगो ने विश्वास बढ़ेगा, और आप का मनोबल ऊंचा होगा, अगर आप खुद से विमुख होते जायेगे तो कभी खड़े नही हो पाएंगे, कोई भी कार्य की कामयाबी हासिल नही होगी,* *गलत होने के बाद जब सही करने की जिद बनती है बस वही से जीत का सिलसिला शुरू होता है।।* *रोता वही है जो ...
ध्यान का महत्व
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🪴🌻🪴🌻🪴🌻🪴🌻🪴🌻🪴 *हमारे जीवन में ध्यान का क्या महत्व है, ये एक योग क्रिया है जो मन को एकत्रित करती है, बहुत सी बाते जो जरूरी है वो जब बिखर जाती हैं तब उनको संग्रहित करने को मन से ध्यान लगाते है।।* *जब हम छोटे थे तब से हमे बोला जाता था, हमेशा खेल कूद में रहते हो थोड़ा पुस्तको में भी ध्यान लगाओ, असल में ध्यान होता क्या है, जब हमारा मन विचार बिखर जाते है तब ध्यान लगाते है, आंख बंद करके एक निश्चित वस्तु को याद करते है, वो ही हमे दिखने लगे तब हमारा ध्यान पूर्ण होता है।।* *महाभारत काल में ध्यान का सही उपयोग अर्जुन ने किया था, उनको ध्यान का पूर्ण ज्ञान था, गुरु द्रोण जी ने पूछा कि चिड़िया का क्या क्या अंग दिख रहा है, तब अर्जुन ने सटीक जवाब दिया, गुरु जी चिड़िया की सिर्फ आंख दिख रही हैं।।* *हम अगर रोज सुबह एक निश्चित समय पर ध्यान लगाए तो हमारे मस्तिष्क का विचारो का बेहद विकास होता है, जब हम ध्यान को सिख जाते है या मतलब अपनी इंद्रियों को एकत्रित कर पाते है तो हम कोई भी असंभव कार्य कर सकते है।।* *ध्यान हमे तेजस्वी बनाता है, ईश्वर के नजदीक लता है,* *आपका दिन शुभ...
यहीं समय है सही समय है भारत का अनमोल समय है असंख्य भुजाओं की शक्ति है हर तरफ़ देश की भक्ति है तुम उठो तिरंगा लहरा दो भारत के भाग्य को फ़हरा दो यही समय है सही समय है भारत का अनमोल समय है कुछ ऐसा नहीं जो कर न सको कुछ ऐसा नहीं जो पा न सको तुम उठ जाओ तुम जुट जाओ सामर्थ्य को अपने पहचानो कर्तव्य को अपने सब जानो यहीं समय है सही समय है भारत का अनमोल समय है
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UP में 16 अगस्त से खुल जाएंगे स्कूल-कॉलेज: 5 अगस्त से विश्विवद्यालयों और कॉलेजों में एडमिशन प्रक्रिया शुरू होगी, एक सितंबर से चलेंगी कक्षाएं; नई गाइडलाइन जारी .
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उत्तर प्रदेश में 16 अगस्त से प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेज खुल जाएंगे। राज्य सरकार ने इसके लिए आदेश जारी कर दिया है। 5 अगस्त से राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में स्नातक के एडमिशन होंगे। एक सितंबर से उच्च शिक्षण संस्थानों में कक्षाएं चलेंगी। वहीं, स्कूलों में 16 अगस्त से ही पढ़ाई शुरू हो जाएगी। राज्य सरकार की गाइडलाइन के अनुसार, स्कूल और कॉलेज 50% क्षमता के साथ ही खुल सकेंगे। मतलब आधे छात्र ही स्कूल आ पाएंगे। केवल उन्हीं छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ को शिक्षण संस्थानों में आने की अनुमति होगी जिनमें कोई लक्षण नहीं होगा। सैनिटाइजेशन, थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था भी करनी होगी। सभी को मास्क पहनना अनिवार्य होगा।
गुरु पूर्णिमा
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वंदउँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि सुवास सरस अनुरागा।। तस्मै श्रीगुरवे नमः सद्गुरु चरणकमलेभ्यो नमः। उन सभी गुरुओं को इस पावन अवसर पर कोटिशः नमन वन्दन, जिनसे इस दुर्लभ मानव जीवन को सतत अभ्युदयकारक बनाकर सार्थक करने की प्रेरणा मिलती रही है। आप सभी के जीवन को ऐसा सद्गुरु मिले जो जड़बुद्धि मिटाकर चैतन्य बना दे, अविद्या को दूरकर विद्यावान बना दे अज्ञानान्धकार को दूर कर ज्ञान का प्रकाश भर दे दुर्गुणों को दूर कर सद्गुणों से युक्त कर दे। आप सभी को गुरु पूर्णिमा की ढेर शुभकामनाएं एवं बधाइयां।
संध्या चिंतन
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जाड्यं धियो हरति सिंचति वाचि सत्यं , मानोन्नतिं दिशति पापमपाकरोति । चेतः प्रसादयति दिक्षु तनोति कीर्तिं , सत्संगतिः कथय किं न करोति पुंसाम् ॥ भावार्थ : अच्छी संगति जीवन का आधार हैं अगर अच्छे मित्र साथ हैं तो मुर्ख भी ज्ञानी बन जाता हैं, झूठ बोलने वाला सच बोलने लगता हैं, अच्छी संगति से मान प्रतिष्ठा बढ़ती हैं पापी दोषमुक्त हो जाता हैं । मिजाज खुश रहने लगता हैं और यश सभी दिशाओं में फैलता हैं, मनुष्य का कौन सा भला नहीं होता? अर्थात मनुष्य का हर प्रकार से भला होता है। जय जय सियाराम 💐🙏🏻
#वैदिक_गणित
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लखनऊ :- बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में अब पहली कक्षा से संस्कृत पढ़ाई जाएगी। वहीं, कक्षा 4-5 में वैदिक गणित का अध्ययन कराया जाएगा। देश के राजनीतिक मानचित्र में हुए बदलाव के जरिए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए हटने के बाद की स्थिति की जानकारी दी जाएगी। यही नहीं, नौनिहालों को गुरु गोविंद सिंह के साहिबजादों का बलिदान भी पढ़ाया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने शैक्षिक सत्र 2021-22 के पाठ्यक्रम में सत्तारूढ़ दल के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सरोकार के एजेंडे से जुड़े मुद्दों को शामिल किया है। कक्षा 6 की पुस्तक "पृथ्वी और हमारा जीवन' में देश के मानचित्र के जरिए पढ़ाया जाएगा कि जिस अनुच्छेद 370 व 35ए के जरिए जम्मू-कश्मीर को विशेष स्वायत्तता मिली थी और उनके नागरिकों को विशेष अधिकार प्राप्त थे, उसके खत्म होने के बाद लद्दाख और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं। लद्दाख की राजधानी लेह व जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर है। वैसे, ये अनुच्छेद 5 अगस्त 2019 को ही हटा लिए गए। थे, लेकिन पाठ्यक्रम में अब शामिल किए गए हैं। मजबूत करेंगे संस्कृत शिक्षा की नींव बच्चों में संस्कृत शिक्षा की ...
निशंक का जाना
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निशंक के कार्यकाल के दौरान शिक्षा मंत्रालय ने कई महत्त्वपूर्ण पदों की भर्ती को रोके रखा। इसकी वजह से 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से करीब आधे विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति नहीं हो पाई। इनमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय - हरियाणा, हैदराबाद विश्वविद्यालय प्रमुख हैं। ये विश्वविद्यालय कई महीनों से बिना कुलपतियों के काम कर रहे हैं जबकि नई शिक्षा नीति को लागू करने के विभिन्न फैसले लेने के लिए इनकी बहुत अधिक आवश्यकता है। इसी तरह पांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) में पूर्णकालिक निदेशक नहीं है जिनमें दिल्ली, भुवनेश्वर, पटना, इंदौर और मंडी शामिल हैं। वहीं, आठ आइआइटी बोर्ड ऑफ गर्वर्नस के अध्यक्ष के बिना ही चल रहे हैं। इनमें दिल्ली, बॉम्बे, रुड़की, गांधीनगर, मंडी, रोपड़, त्रिरुपति और गोवा शामिल हैं। महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति को रोके रखने की वजह से एक ओर तो नई शिक्षा नीति को लागू करने में समय लग रहा है। दूसरा, कोरोना महामारी के समय लिए जाने वाले महत्त्वपूर्ण * निर्णयों को लेने में देरी हुई । ...
NET v/s PhD
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UGC NET 2021: नेट पास कर शिक्षक बनने की राह मुश्किल, नियुक्ति में पीएचडी को दिया जाता है वेटेज....नेट (नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट) पास कर चुके लाखों नौजवानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। आने वाले समय में सहायक प्रोफेसर की सीधी भर्ती में पीएचडी को भी लगभग अनिवार्य करने की तैयारी चल रही है। जहां नेट को न्यूनतम अर्हता के रूप में मान्यता मिली हुई है, वहां भी पीएचडी उम्मीदवारों को ज्यादा तरजीह दी जा री है। इस प्रकार आने वाले दिनों में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षा महत्वहीन साबित हो सकती है। विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए अभी नेट या पीएचडी में से एक न्यूनतम होना जरूरी है। जो उम्मीदवार पीएचडी है, उसे नेट करने की जरूरत नहीं है। जो नेट किया हुआ है, वह बिना पीएचडी के भी सहायक प्रोफेसर पद पर नियुक्ति पा सकता है, लेकिन पिछले समय से इस नियम का क्रियान्वयन हो रहा है कि नेट करने वाले उम्मीदवार को नियुक्ति के अवसर नहीं मिल पाते हैं। नियमों को विश्वविद्यालयों द्वारा अपने-अपने तरीके से लागू किया जा सकता है। यूजीसी ने दोनों अर्हताओं को...
*#UPSSSC_PET -2021 परीक्षा आयोजित करने के लिए 19 अगस्त 2021 की तारीख को मंजूरी ।*
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⛳ *सुप्रभात🌞वन्दे मातरम्*⛳ 🚩🦚🌹🐌🐄🐌🌹🦚🚩 अषाढ़ मास, कृष्ण पक्ष, *पँचमी*, शतभिषा नक्षत्र, सूर्य उत्तरायण, ग्रीष्म ऋतु, युगाब्ध ५१२३, विक्रम संवत-२०७८, मंगलवार, 29 जून 2021. 🕉~~~~~~~~~~~~~🕉 *प्रभात दर्शन -* ~~~~~~~ "पूर्णतः निःस्वार्थ रहो, स्थिर रहो और कार्य करो। एक महत्वपूर्ण बात यह कि सबके सेवक बनो और दूसरों पर शासन करने का तनिक भी यत्न न करो, क्योंकि इससे ईर्ष्या उतपन्न होगी और इससे हर चीज नष्ट हो जायेगी। आगे बढ़ो, तुमने बहुत अच्छा कार्य किया है। हमे अन्य की सहायता की प्रतीक्षा किये बिना, अपने भीतर से ही सहायता लेनी चाहिए। आत्मविश्वासी, सच्चे, कर्तव्यनिष्ठ एवं सहनशील बनो। फिर देखो ! एक समृद्ध, शक्तिशाली भारत आपके सामने है। *--स्वामी विवेकानंद* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~ *🚩आपका दिन मंगलमय हो🚩* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~
डेल्टा प्लस का खतरा
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कें द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की इस घोषणा के साथ स्वास्थ्यकर्मियों सहित आम लोगों के मन में भय मिश्रित चिंता व्याप्त हो गई है कि देश के कुछ हिस्सों में कोविड-19 विषाणु के नये स्वरूप के करीब 40 मामले सामने आए हैं, जिसे चिंताजनक विषाणु के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इस नये स्वरूप को डेल्टा प्लस का नाम दिया गया है जिसका विकास डेल्टा विषाणु से हुआ है। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अभी तक महाराष्ट्र में 21, मध्य प्रदेश में 6, तमिलनाडु में 3, केरल में 3 और पंजाब, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश तथा जम्मू-कश्मीर में डेल्टा प्लस से संक्रमित 1-1 मरीजों में इसकी पुष्टि हुई है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 के इस नये स्वरूप से सतर्क रहने का परामर्श जारी कर दिया है। दरअसल, कोविड-19 विषाणु अभी तक दुनियाभर के महामारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए रहस्यमय बना हुआ है । स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आज से करीब 100 साल पहले आए स्पेनिश फ्लू ने भी करोड़ों लोगों को अपना निवाला बनाया था। संतोष की बात यह थी कि एक-दो साल के दौरान ही स्पेनिश फ्लू का विषाणु कमजोर पड़कर मामूली...
योग साधना द्वारा जीवन का विकास
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योग साधना द्वारा जीवन विकास योग का नाम सुनते ही कितने ही लोग चौंक उठते हैं उनकी निगाह में यह एक ऐसी चीज है जिसे लम्बी जटा वाला और मृग चर्मधारी साधु जंगलों या गुफाओं में किया करते हैं। इसलिये वे सोचते हैं कि ऐसी चीज से हमारा क्या सम्बन्ध? हम उसकी चर्चा ही क्यों करें? पर ऐसे विचार इस विषय में उन्हीं लोगों के होते हैं जिन्होंने कभी इसे सोचने-विचारने का कष्ट नहीं किया। अन्यथा योग जीवन की एक सहज, स्वाभाविक अवस्था है जिसका उद्देश्य समस्त मानवीय इन्द्रियों और शक्तियों का उचित रूप से विकास करना और उनको एक नियम में चलाना है। इसीलिये योग शास्त्र में “चित्त वृत्तियों का निरोध” करना ही योग बतलाया गया है। गीता में ‘कर्म की कुशलता’ का नाम योग है तथा ‘सुख-दुख के विषय में समता की बुद्धि रखने’ को भी योग बतलाया गया है। इसलिये यह समझना कोरा भ्रम है कि समाधि चढ़ाकर, पृथ्वी में गड्ढा खोदकर बैठ जाना ही योग का लक्षण है। योग का उद्देश्य तो वही है जो योग शास्त्र में या गीता में बतलाया गया है। हाँ इस उद्देश्य को पूरा करने की विधियाँ अनेक हैं, उनमें से जिसको जो अपनी प्रकृति और रुचि के अनुकूल जान पड़े वह उसी...
हमारी संस्कृति, जयतु संस्कृतं
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एक ही अक्षर से बना श्लोक..................... * एक ही अक्षर से बना श्लोक पढ़ा है कभी..?? यदि नहीं, तो लीजिए........ . "कः कौ के केककेकाकः काककाकाककः ककः। काकः काकः ककः काकः कुकाकः काककः कुकः॥" . अर्थात् - परब्रह्म (कः) [श्री राम] पृथ्वी (कौ) और साकेतलोक (के) में [दोनों स्थानों पर] सुशोभित हो रहे हैं। उनसे सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में आनन्द निःसृत होता है। वह मयूर की केकी (केककेकाकः) एवं काक (काकभुशुण्डि) की काँव-काँव (काककाकाककः) में आनन्द और हर्ष की अनुभूति करते हैं। उनसे समस्त लोकों (ककः) के लिए सुख का प्रादुर्भाव होता है। उनके लिए [वनवास के] दुःख भी सुख (काकः) हैं। उनका काक (काकः) [काकभुशुण्डि] प्रशंसनीय है। उनसे ब्रह्मा (ककः) को भी परमानन्द की प्राप्ति होती है। वह [अपने भक्तों को] पुकारते (काकः) हैं। उनसे कूका अथवा सीता (कुकाकः) को भी आमोद प्राप्त होता है। वह अपने काक [काकभुशुण्डि] को पुकारते (काककः) हैं और उनसे सांसारिक फलों एवं मुक्ति का आनन्द (कुकः) प्रकट होता है।
सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी, बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी, गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी, दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी। चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी, बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।।
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वैश्विक कोरोना महामारी से बचाव के रूप में सोशल डिस्टेंसिंग के धार्मिक एवं सांस्कृतिक सम्प्रत्यय का अध्ययन
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प्रस्तावना - भारत सहित आज दुनिया के लगभग सभी देश कोरोना वायरस की विभीषिका का सामना कर रहे हैं। इसके संक्रमण से बचने के लिए "सोशल डिस्टेंस" को आशा भरी नजर से देखा जा रहा है। सभी से यह उम्मीद की जा रही है कि, वे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें, भीड़भाड़ से बचें, जिससे तेजी से फैल रहे वायरस के संक्रमण को कम किया जा सके| चीन के वुहान प्रांत से शुरु हुआ यह विषाणु आज संपूर्ण विश्व को संक्रमित कर चुका है। विश्व के विकसित देश, जिनकी स्वास्थ्य व्यवस्था अत्यंत उन्नत है, उनको भी कोरोना महामारी ने असहाय कर दिया है। ऐसे में जब इस आपदा का कोई समाधान नहीं मिल रहा है, " सोशल डिस्टेंसिंग" को मानना और इसका पालन करना महत्वपूर्ण हो जाता है| कोविड-19 के पूर्व संपूर्ण दुनिया पहले भी महामारीयो का दंश झेल चुकी है। इलाज के अभाव में लाखों लोग जान गवा चुके हैं। जैसे- प्लेग, चेचक, हैजा/कालरा, स्वाइन फ्लू, सार्स इत्यादि। भारत के संदर्भ में यह उल्लेखनीय है कि, हम भारतीय महामारीओं के संपर्क में बहुत कम ही आए हैं। भारतीय इतिहास में सबसे अधिक मौतें 18वीं सदी में हैजों की वजह से हुई है। ...
अध्यापक शिक्षा का भारतीयकरण
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अध्यापक शिक्षा का भारतीयकरण प्रस्तावना भारत में शिक्षा, भारत की महान सांस्कृतिक परम्परा और सभ्यता का दर्पण है। यह हमारी भव्य विकसित सभ्यता का साक्षात प्रमाण भी है। यही कारण है कि, भारतीय समाज के विकास और उसमें होने वाले परिवर्तनों की रूपरेखा में हम शिक्षा और उसकी भूमिका को निरंतर विकासशील पाते हैं। भारत की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परम्परा विश्व इतिहास में प्राचीनतम है। प्राचीन काल में शिक्षा को अत्यधिक महत्व दिया गया था। भारत ‘विश्वगुरु’ की उपाधि से विभूषित था। भारत की प्राचीन शिक्षा, आध्यात्मिकता पर आधारित पद्धति थी। शिक्षा, मुक्ति एवं आत्मबोध का ज्ञान-उपार्जन करने का साधन थी। प्राचीन शिक्षा की गुरुकुल प्रणाली और विद्यार्थी- शिक्षक सम्बंध- भारतीय शिक्षा में आचार्य का स्थान बड़ा ही गौरव का था। उनका बड़ा आदर और सम्मान होता था। अध्यापक, छात्रों का चरित्र निर्माण, उनके लिए भोजनवस्त्र का प्रबंध, रुग्ण छात्रों की चिकित्सा, शुश्रूषा करते थे। कुल में सम्मिलित ब्रह्मचारी मात्र को आचार्य अपने परिवार का अंग मानते थे और उनसे वैसा ही व्यवहार रखते थे। आचार्य धर्मबुद्धि से नि:शुल्क शिक्...