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जून, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

योग

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 🌷🔥 *योग* 🔥🌷 *प्रिय मित्रों! वर्तमान परिस्थिति में शान्ति की परम आवश्यकता है जिसके लिए आप सभी प्रयासरत भी है । इस संदर्भ में हम आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते है कि हमने जो योग और शान्ति के लिए शोध किया है उसमें अनेक शास्त्रों में योग की क्या परिभाषा दी गयी है उसे हम आप सभी को समर्पित करते है । हमारे शोध के अनुसार शान्ति शब्द की विवेचना तथा परिभाषा सनातन वैदिक साहित्य के अतिरिक्त अनुपलब्ध है।* *Dear Gentlemen! There is an absolute need for peace in the present situation, for which you are all striving. In this context, we would like to draw your attention that in the research we have done for yoga and peace, what is the definition of yoga given in many scriptures, we dedicate it to all of you. According to our research, the explanation and definition of the word Shanti is unavailable apart from the Sanatan Vedic literature.* *योगः* 1. *महर्षि पतंजलि के अनुसार* -      *‘‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’’* (पतंजलि.यो.सू. 1/2)       अर्थात् चित्त की वृत्तियों क...

यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम

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 18 जून को आएगा यूपी बोर्ड का रिजल्ट  18 जून को दोपहर 2 बजे जारी होगा हाई स्कूल का परिणाम  18 जून को ही शाम 4 बजे जारी होगा इंटरमीडिएट का परीक्षा फल यूपी बोर्ड में 5192916 परीक्षार्थी  थे पंजीकृत ।

सुप्रभातम

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 🌷🌷🔥ओउम्🔥🌷🌷 *यतोऽभ्युदयनि:श्रेयससिद्धिः स धर्मः।* - वैशेषिक०१/१/२ जिस कर्म से इहलौकिक (सृष्टि विद्या) यानि भौतिक उन्नति हो और पारलौकिक (आत्मविद्या) यानि आध्यात्मिक उन्नति हो, उसी कर्म को करने का नाम *धर्म* है। The work which leads to material progress as well as spiritual progress is called 'Dharma' i.e. righteous conduct. अर्थात्  भौतिक यानि प्राकृतिक नियमों का पालन करना धर्म है । मानसिक और आत्मिक उन्नति करना आध्यात्म है। i.e. To obey the physical or natural laws is Dharma. while Spirituality is to make mental and spiritual progress. *"प्रकृति के तीन नियम"*  *"Three laws of Nature"* 1. प्रकृति का प्रथम नियम:- यदि खेतों में बीज न डाला जाए तो प्रकृति उसे घास फूस और झाड़ियों से भर देती है। ठीक उसी प्रकार यदि दिमाग में अच्छे एवं सकारात्मक विचार न भरे जाएं तो बुरे एवं नकारात्मक विचार, उसमें अपनी जगह बना लेते हैं। 1. First law of Nature: If the seeds are not planted in the fields, nature fills it with grass and bushes. Similarly, if good and positive though...

पर्यावरण दिवस

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 आज विश्व पर्यावरण दिवस है, मित्रो, चूकिं हम आध्यात्मिक प्राणी भी हैं, इसलिए पर्यावरण को अध्यात्म की दृष्टि से समझने की कोशिश करेंगे। पर्यावरण, वातावरण या प्रकृति, ये शब्द अर्थ की दृष्टि से काफी कुछ मिलते-जुलते हैं, हमारे ऋषियों ने पंच महाभूत तथा अष्टप्रकृति के नाम से जिन मुख्य तत्वों को माना है। उन्हें हम आज भी आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथिवी, सूर्य और चंद्रमा के रूप में देख सकते हैं, पर्यावरण शुध्दि और संतुलन की दृष्टि से यज्ञ का महत्व आज वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है, अत: उपर्युक्त तत्वों में यज्र्ञकत्ता को भी आठवें क्रम पर स्वीकार किया गया था, ऋषियों ने आध्यात्मिक पर्यावरण को भी भूगोलीय व खगोलीय पर्यावरण के अभिन्न हिस्से के रूप में माना।  वैदिक शान्ति पाठ में भी हम इन्हीं प्राकृतिक शक्तियों की शान्ति और समन्वय की प्रार्थना अथवा कामना अनादिकाल से करते आये हैं, यह स्वाभाविक ही है, कि इसी वैदिक पृष्ठभूमि पर भारतीय संस्कृति के अमर गायक के रूप में अवतरित होने के कारण महाकवि कालिदासजी ने भी बड़े रोचक, प्रभावी तथा व्यावहारिक ढंग से पर्यावरण के प्रति संवेदना तथा सजगता की बातें बतायीं...