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राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा

 राष्ट्रीय शिक्षा नीति, #NEP2020 की सिफारिश के आधार पर, पेपरलेस और बॉटम-अप दृष्टिकोण को अपनाते हुए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।  आपको इस विशाल और गहन परामर्श प्रक्रिया में शामिल होने और एनसीएफ के निर्माण में योगदान करने के लिए आमंत्रित किया जाता है।  शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वावधान में एनसीईआरटी द्वारा किए जा रहे सर्वेक्षण को भरकर अपने बहुमूल्य सुझाव साझा करें।  हर इनपुट मायने रखता है।  लिंक🔗:  http://vsms.sms.gov.in/OgchoN4mIHt

योग

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 🌷🔥 *योग* 🔥🌷 *प्रिय मित्रों! वर्तमान परिस्थिति में शान्ति की परम आवश्यकता है जिसके लिए आप सभी प्रयासरत भी है । इस संदर्भ में हम आपका ध्यान आकर्षित करना चाहते है कि हमने जो योग और शान्ति के लिए शोध किया है उसमें अनेक शास्त्रों में योग की क्या परिभाषा दी गयी है उसे हम आप सभी को समर्पित करते है । हमारे शोध के अनुसार शान्ति शब्द की विवेचना तथा परिभाषा सनातन वैदिक साहित्य के अतिरिक्त अनुपलब्ध है।* *Dear Gentlemen! There is an absolute need for peace in the present situation, for which you are all striving. In this context, we would like to draw your attention that in the research we have done for yoga and peace, what is the definition of yoga given in many scriptures, we dedicate it to all of you. According to our research, the explanation and definition of the word Shanti is unavailable apart from the Sanatan Vedic literature.* *योगः* 1. *महर्षि पतंजलि के अनुसार* -      *‘‘योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः’’* (पतंजलि.यो.सू. 1/2)       अर्थात् चित्त की वृत्तियों क...

यूपी बोर्ड परीक्षा परिणाम

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 18 जून को आएगा यूपी बोर्ड का रिजल्ट  18 जून को दोपहर 2 बजे जारी होगा हाई स्कूल का परिणाम  18 जून को ही शाम 4 बजे जारी होगा इंटरमीडिएट का परीक्षा फल यूपी बोर्ड में 5192916 परीक्षार्थी  थे पंजीकृत ।

सुप्रभातम

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 🌷🌷🔥ओउम्🔥🌷🌷 *यतोऽभ्युदयनि:श्रेयससिद्धिः स धर्मः।* - वैशेषिक०१/१/२ जिस कर्म से इहलौकिक (सृष्टि विद्या) यानि भौतिक उन्नति हो और पारलौकिक (आत्मविद्या) यानि आध्यात्मिक उन्नति हो, उसी कर्म को करने का नाम *धर्म* है। The work which leads to material progress as well as spiritual progress is called 'Dharma' i.e. righteous conduct. अर्थात्  भौतिक यानि प्राकृतिक नियमों का पालन करना धर्म है । मानसिक और आत्मिक उन्नति करना आध्यात्म है। i.e. To obey the physical or natural laws is Dharma. while Spirituality is to make mental and spiritual progress. *"प्रकृति के तीन नियम"*  *"Three laws of Nature"* 1. प्रकृति का प्रथम नियम:- यदि खेतों में बीज न डाला जाए तो प्रकृति उसे घास फूस और झाड़ियों से भर देती है। ठीक उसी प्रकार यदि दिमाग में अच्छे एवं सकारात्मक विचार न भरे जाएं तो बुरे एवं नकारात्मक विचार, उसमें अपनी जगह बना लेते हैं। 1. First law of Nature: If the seeds are not planted in the fields, nature fills it with grass and bushes. Similarly, if good and positive though...

पर्यावरण दिवस

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 आज विश्व पर्यावरण दिवस है, मित्रो, चूकिं हम आध्यात्मिक प्राणी भी हैं, इसलिए पर्यावरण को अध्यात्म की दृष्टि से समझने की कोशिश करेंगे। पर्यावरण, वातावरण या प्रकृति, ये शब्द अर्थ की दृष्टि से काफी कुछ मिलते-जुलते हैं, हमारे ऋषियों ने पंच महाभूत तथा अष्टप्रकृति के नाम से जिन मुख्य तत्वों को माना है। उन्हें हम आज भी आकाश, वायु, अग्नि, जल, पृथिवी, सूर्य और चंद्रमा के रूप में देख सकते हैं, पर्यावरण शुध्दि और संतुलन की दृष्टि से यज्ञ का महत्व आज वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है, अत: उपर्युक्त तत्वों में यज्र्ञकत्ता को भी आठवें क्रम पर स्वीकार किया गया था, ऋषियों ने आध्यात्मिक पर्यावरण को भी भूगोलीय व खगोलीय पर्यावरण के अभिन्न हिस्से के रूप में माना।  वैदिक शान्ति पाठ में भी हम इन्हीं प्राकृतिक शक्तियों की शान्ति और समन्वय की प्रार्थना अथवा कामना अनादिकाल से करते आये हैं, यह स्वाभाविक ही है, कि इसी वैदिक पृष्ठभूमि पर भारतीय संस्कृति के अमर गायक के रूप में अवतरित होने के कारण महाकवि कालिदासजी ने भी बड़े रोचक, प्रभावी तथा व्यावहारिक ढंग से पर्यावरण के प्रति संवेदना तथा सजगता की बातें बतायीं...

केदारनाथ यात्रा

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हमारी केदारनाथ धाम की यात्रा 22 मई 2022  रुद्रप्रयाग गुप्तकाशी फाटा केदारधाम

टिहरी बांध, टिहरी गढ़वाल

 भागीरथी नदी पर बना टिहरी बांध इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है। लगभग 260.5 मीटर ऊंचे इस बांध का बिजली उत्पादन तथा सिंचाई में अहम योगदान है। इसी के निकट स्थित है टिहरी झील, जहां पर आप वॉटर स्पोर्ट्स का भरपूर आनंद ले सकते हैं। #uttarakhand #uttarakhandtourism

बुद्ध पूर्णिमा

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 बुद्ध पूर्णिमा विशेष 〰️〰️🌸🌸〰️〰️ भगवान बुध के जन्म दिवस को बुद्ध पूर्णिमा के रुप में मनाए जाने की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है. इस वर्ष बुध पूर्णिमा 16 मई 2022 को मनाई जाएगी. बुद्ध पूर्णिमा को “बुद्ध जयन्ती” और “वैसाक” और “वैशाख पूर्णिमा” नामों से भी पुकारा जाता है। बुधपूर्णिमा के शुभ अवसर पर भूमि, भवन और वाहन की खरीद के साथ ही पदभार ग्रहण करना बहुत ही शुभ माना जाता है। नए काम की शुरुआत के लिए भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। ईसा पूर्व कपिलवस्तु के महाराजा शुद्धोदन की धर्मपत्नी महारानी महामाया देवी की कोख से नेपाल की तराई के लुम्बिनी वन में जन्मे सिद्धार्थ ही आगे चलकर बुद्ध कहलाए। बुद्ध के जन्म, बोध और निर्वाण के संदर्भ में भारतीय पंचांग के वैशाख मास की पूर्णिमा की पवित्रता की प्रासंगिकता स्वयंसिद्ध है। वैसाखी पूर्णिमा पावनता की त्रयी है। इस पुनीत तिथि को ही बुद्ध का अवतरण हुआ, आत्मज्ञान अर्थात बोध हुआ और महापरिनिर्वाण हुआ। गौतम बुद्ध ने अपने उपदेशों में संतुलन की धारणा को महत्व दिया। उन्होंने इस बात पर बहुत बल दिया कि भोग की अति से बचना जितना आवश्यक है उतना ही योग की अत...

नंदी

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 क्या नंदी के बिना अधूरे हैं भगवान शिव? भगवान शिव और नंदी के बीच एक गहरा रिश्ता है.। शायद इसलिए नंदी हमेशा भगवान शिव की प्रतिमा के सामने विराजते हैं. वो न सिर्फ भगवान शिव के वाहन हैं बल्कि शिव के गणों में सबसे श्रेष्ठ भी हैं.। कहा जाता है कि सभी भक्तों की आवाज़ को नंदी ही शिव तक पहुंचाते हैं. नंदी की प्रार्थना को भगवान शिव कभी अनसुनी नहीं करते, इसलिए भक्तों की हर मनोकामना नंदी की बदौलत जल्दी पूरी हो जाती है.। भगवान शिव और नंदी के इस घनिष्ठ संबंध को देखकर मन में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या भोलेनाथ नंदी के बिना अधूरे हैं? आज हम आपको बताते हैं कि नंदी भगवान शिव के सारे गणों में सबसे श्रेष्ठ और अच्छे दोस्त कैसे बने? और नंदी शिव को इतने प्यारे क्यों हैं? शिव और नंदी की कहानी – शिलाद ऋषि के पुत्र थे नंदी। पुराणों में प्रचलित एक कहानी के मुताबिक ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करनेवाले शिलाद ऋषि को अपने वंश को आगे बढ़ाने की चिंता सताने लगी थी. वंश को आगे बढ़ाने के लिए वे एक पुत्र को गोद लेना चाहते थे. इसी कामना से उन्होने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी आराधना शुरू की.। शिव की कृपा से मि...

ज्ञानवापी

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 ॥ '#ज्ञानवापी’ (ज्ञान का कुआँ)॥ मूल श्रीकाशीविश्वनाथ मन्दिर परिसर, #वाराणसी में अष्टकोणीय ‘ज्ञानवापी’ (ज्ञान का कुआँ) ठीक उसी प्रकार अवस्थित है जिस प्रकार मक्का के ‘मक्केश्वर महादेव मन्दिर’ (सम्प्रति ‘अल्-मस्जिद-अल्-हरम’) परिसर में ‘गंगाजलम्’ (‘जमजम’) अवस्थित है। शिवलिंग पर जलाभिषेक हेतु शिवालय में कुएँ की व्यवस्था, प्राचीन वैदिक परम्परा है। कहने की आवश्यकता नहीं कि ‘ज्ञानवापी' का जल श्रीकाशीविश्वनाथजी पर चढ़ाया जाता था। ब्रिटिश लाइब्रेरी, लन्दन; लाइब्रेरी ऑफ़ काँग्रेस, वाशिंगटन; जे. पॉल गेट्टी म्यूज़ियम, कैलिफोर्निया, इत्यादि में विदेशी फ़ोटोग्राफ़रों द्वारा सन् 1859 से 1910 के मध्य लिए गए ज्ञानवापी के अनेक चित्र संगृहीत हैं जिनको देखकर रोमांच हो उठता है। इन फ़ोटोग्राफ़रों में फेलिस बीटो (1832-1909), सैम्युअल बर्न (1834-1912), विलियम हैरी जैक्सन (1843-1942), आदि प्रमुख हैं। इन चित्रों में विभिन्न कोणों से ज्ञानवापी, उसके आसपास अवस्थित #नन्दी और गणपति आदि की प्रतिमाओं का अवलोकन किया जा सकता है।

हमारे राम

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 🙏🌹 *हमारे राम* 🌹🙏 *राम* शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना। अपने मार्ग से भटका हुआ कोई क्लांत पथिक किसी सुरम्य स्थान को देखकर ठहर जाता है। हमने सुखद ठहराव का अर्थ देने वाले जितने भी शब्द गढ़े, सभी में राम अंतर्निहित है, यथा  आराम, विराम, विश्राम, अभिराम, उपराम  जो रमने के लिए विवश कर दे, वह *राम* जीवन की आपाधापी में पड़ा अशांत मन जिस आनंददायक गंतव्य की सतत तलाश में है, वह गंतव्य है *राम* भारतीय मन हर स्थिति में *राम* को साक्षी बनाने का आदी है। दुःख में *हे राम*, पीड़ा में *ऐ राम*, लज्जा में *हाय राम*, अशुभ में *अरे राम राम*,  अभिवादन में *राम राम*, शपथ में *रामदुहाई*, अज्ञानता में *राम जाने*, अनिश्चितता में *राम भरोसे*, अचूकता के लिए *रामबाण*, मृत्यु के लिए *रामनाम सत्य*, सुशासन के लिए *रामराज्य* जैसी अभिव्यक्तियां पग-पग पर *राम* को साथ खड़ा करतीं हैं। *राम* भी इतने सरल हैं कि हर जगह खड़े हो जाते हैं। हर भारतीय उन पर अपना अधिकार मानता है। जिसका कोई नहीं उसके लिए राम हैं- *निर्बल के बल राम*। असंख्य बार देखी सुनी पढ़ी जा चुकी *रामकथा* का आकर्षण कभ...

स्वयं को पहचानें

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 🪴🌺🪴🌺🪴🌺🪴🌺 *" स्वयं को पहचानें "*  *क्या आपने कभी ये विचार किया कि इस दुनिया में आपकी तकदीर कौन और कैसे बदल सकता है..? कौन है जो आपके चेहरे पर मुस्कुराहट ला सकता है..? कौन है जो आपके जीवन को सुखी और आनंदमय बना सकता है और कौन है वो जो आपकी हर समस्या का हल ढूँढ सकता है एवं आपके जीवन को एक आदर्श जीवन बना सकता है..?* *कभी आपके सामने ये समस्त प्रश्न उपस्थित हो जायें तो धीरे से उठकर आइने के सामने चले जाना आपको स्वतः इन सभी प्रश्नों का उत्तर प्राप्त हो जायेगा।।* *इस पूरी दुनिया में केवल एक ही इन्सान आपकी तकदीर बदल सकता है। इस पूरी दुनियाँ में केवल एक शख्स ही आपके हर प्रश्न का उत्तर और हर समस्या का समाधान निकाल सकता है और वो है केवल और केवल आप।।* *दूसरे आपको केवल सलाह दे सकते हैं, मार्ग दिखा सकते हैं मगर उस पर चलना आपके स्वयं के हाथों में ही है।।* 

बीएड प्रवेश 2022

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बीएड प्रवेश परीक्षा 2022 15 अप्रैल को जारी होगा विज्ञापन, 1 से 7 जुलाई के बीच होगी प्रवेश परीक्षा, 5 अगस्त को घोषित होगा परीक्षा परिणाम। शुल्क की दरें.. सामान्य/पिछड़ी- ₹1000/ SC/ST- ₹500/

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु

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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अन्तर्गत संचालित बी०ए०, बी०एस०सी०, बी०काम० एवं बी०सी०ए० प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं कल दिनांक 26 मार्च दिन शनिवार से शुरू हो रही हैं। विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम- 2022 विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.suksn.edu.in पर देखा जा सकता है ।

नई शिक्षा नीति (NEP 2020)

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अब शिक्षा पर  जी डी पी का 6%खर्च होगा जो 1986 से ही कहा जा रहा है किन्तु अभी तक 4% भी खर्च नहीं हुआ। शिक्षा व्यवस्था कुछ बेहतर हो सकता है यदि ईमानदारी से इन सुधारों को लागू किया जाए।

UGC Regulation 2022

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भगवान शंकर

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परमेश्वर शिव त्रिकाल दृष्टा, त्रिनेत्र, आशुतोष, अवढरदानी, जगतपिता आदि अनेक नामों से जानें जाते हैं। महाप्रलय के समय शिव ही अपने तीसरे नेत्र से सृष्टि का संहार करते हैं परंतु जगतपिता हो कर भी शिव परम सरल व शीघ्रता से प्रसन्न होने वाले हैं। संसार की सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाले शिव को स्वयं के लिए न ऐश्वर्य की आवश्यकता है न अन्य पदार्थों की। वे तो प्रकृति के मध्य ही निवासते हैं। कन्दमूल ही जिन्हें प्रिय हैं व जो मात्र जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। जहां अन्य देवों को प्रसन्न करने हेतु कठिन अनुष्ठान किया जाता है वहीं शिव मात्र जलाभिषेक से ही प्रसन्न होते हैं। शिव का स्वरूप स्वयं में अद्भुत तथा रहस्यमय हैं। चाहे उनके शिखर पर चंद्रमा हो या उनके गले की सर्प माला हो या मृग छाला हो, हर वस्तु जो भगवान शंकर ने धारण कर रखी है, उसके पीछे गूढ़ रहस्य है। शास्त्रनुसार सभी देवताओं की दो आंखें हैं पर शिव के तीन नेत्र हैं। इस लेख के माध्यम से हम अपने पाठकों को बताते हैं क्यों हैं शिव के तीन नेत्र तथा इसके पीछे क्या रहस्य है। *त्वं ब्रह्मा सृष्टिकर्ता च त्वं विष्णुः परिपालकः। *त्वं शिवः शिवदोऽनन्तः सर्वस...

होली का वास्तविक स्वरूप

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*होली का वास्तविक स्वरूप क्या है?* पांखड अंधविश्वास को छोड़कर इसकी वैज्ञानिकता समझें। इस पर्व का प्राचीनतम नाम वासन्ती नव सस्येष्टि है अर्थात् बसन्त ऋतु के नये अनाजों से किया हुआ यज्ञ, परन्तु होली होलक का अपभ्रंश है। यथा :- तृणाग्निं भ्रष्टार्थ पक्वशमी धान्य होलक: (शब्द कल्पद्रुम कोष)  अर्धपक्वशमी धान्यैस्तृण भ्रष्टैश्च होलक: होलकोऽल्पानिलो मेद: कफ दोष श्रमापह।(भाव प्रकाश) अर्थात् :- 1- तिनके की अग्नि में भुने हुए (अधपके) शमो-धान्य (फली वाले अन्न) को होलक कहते हैं।  यह होलक वात-पित्त-कफ तथा श्रम के दोषों का शमन करता है। 2- होलिका―किसी भी अनाज के ऊपरी पर्त को होलिका कहते हैं-जैसे-चने का पट पर (पर्त) मटर का पट पर (पर्त), गेहूँ, जौ का गिद्दी से ऊपर वाला पर्त। इसी प्रकार चना, मटर, गेहूँ, जौ की गिदी को प्रह्लाद कहते हैं। होलिका को माता इसलिए कहते है कि वह चनादि का निर्माण करती (माता निर्माता भवति) यदि यह पर्त पर (होलिका) न हो तो चना, मटर रुपी प्रह्लाद का जन्म नहीं हो सकता।  जब चना, मटर, गेहूँ व जौ भुनते हैं तो वह पट पर या गेहूँ, जौ की ऊपरी खोल पहले जलता है, इस प्रकार प्रह्लाद ब...

यूपी बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम सत्र 2021-22

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शिव विवाह

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महाशिवरात्रि के दिन शिव विवाह कि अद्भुत कथा!!!!!! तुलसीदास जी ने जिस तरह से शिव जी के विवाह का वर्णन किया है ऐसा विवाह न हुआ है न होगा!  शिवजी आज दुल्हा बने है शिव जी के गण आज शिव जी का श्रृंगार कर रहे है ! जटाओं का मुकुट उस पर सांपो का मौर बना है सांपो का ही कानों में कुंडल है , मस्तक पर चंद्रमा , सांपो का ही जनेऊ धारण किए हुए हैं , तन पर भभूती लगाए हुए हैं....देवाधिदेव शिव जी कि विचित्र बरात जब दुल्हा ही ऐसा है तो बराती कैसे होगे ??  तन छार ब्याल कपाल भूषन नगन जटिल भयंकरा। सँग भूत प्रेत पिसाच जोगिनि बिकट मुख रजनीचरा।। जो जिअत रहिहि बरात देखत पुन्य बड़ तेहि कर सही। देखिहि सो उमा बिबाहु घर घर बात असि लरिकन्ह कही।  अर्थात्–’दूल्हा भगवान शिव के शरीर पर राख (भस्म) लगी है, साँप और कपाल के गहने हैं, वह नंगे, जटाधारी और भयंकर हैं। उनके साथ भयानक मुखवाले भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनियां और राक्षस हैं। जो बारात को देखकर जिन्दा बचेगा, सचमुच उसके बड़े ही पुण्य हैं और वही पार्वती का विवाह देखेगा। लड़कों ने घर-घर जाकर यह बात कही।’ सप्तर्षियों द्वारा पर्वतराज हिमाल...

जीवन में सबक लेने योग्य 9 सूत्र

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*यदि आपके पास महाभारत ग्रंथ पढ़ने का समय न हो तो भी इसका सार 9 सूत्रों को जानकर अवश्य ही समझ लें..‼️* 1. *संतानों की गलत माँग और हठ पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया, तो अंत में आप असहाय हो जायेंगे = कौरव* 2. *आप भले ही कितने भी बलवान हों लेकिन अधर्म के साथ हैं, तो आपकी विद्या, अस्त्र - शस्त्र, शक्ति और वरदान सब निष्फल हो जायेगा = कर्ण* 3. *संतानों को इतना महत्वाकांक्षी मत बना दें कि विद्या का दुरुपयोग कर स्वयंनाश कर सर्वनाश को आमंत्रित करे = अश्वत्थामा* 4. *कभी किसी को ऐसा वचन मत दें कि आपको अधर्मियों के आगे समर्पण करना पड़े = भीष्म पितामह* 5. *संपत्ति, शक्ति व सत्ता का दुरुपयोग और दुराचारियों का साथ अंत में स्वयंनाश का दर्शन कराता है = दुर्योधन*  6. *अंध व्यक्ति - अर्थात मुद्रा, मदिरा, अज्ञान, मोह और काम (मृदुला) अंध व्यक्ति के हाथ में सत्ता को भी विनाश की ओर ले जाती है = धृतराष्ट्र* 7. *व्यक्ति के पास विद्या विवेक से बँधी  हो तो विजय अवश्य मिलती है = अर्जुन* 8. *हर कार्य में छल, कपट, व प्रपंच रच कर आप हमेशा सफल नहीं हो सकते = शकुनि* 9  *यदि आप नीति, धर्म व कर्म का सफलता पूर...

वसंत का आगमन

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 आज से शुरू होगी वसंत ऋतु  ************************ वसंत को ऋतुओ का राजा क्यो कहा जाता है। ========================== वैसे तों हिंदू धर्म में सभी ऋतुओं का महत्व बताया गया हैं मगर वसंत ऋतु विशेष मानी जाती हैं मौसम प्रकृति के बदलाव का एहसास कराता हैं हर बदलती हुई ऋतु अपने साथ एक नया संदेश लेकर आती हैं वही भारत देश की प्रकृति के मुताबिक कुल 6 ऋतुएं प्रमुख मानी जाती हैं वसंत ऋतुहेमंत ऋतु, शिशिर ऋतु, वसंत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, वर्षा व शरद ऋतु। इनमें वसंत को सब ऋतुओ का राजा माना जाता हैं। वही वसंत को ऋतुओं का राजा कहने के पीछे कई सारे कारण बताए गए हैं जैसे फसल तैयार रहने से उल्लास और खुशी के पर्व, मंगल कार्य, विवाह, सुहाना मौसम, आम की मोहनी खुशबू, कोयल की कूक सब मिलकर अनुकूल समां बाधते हैं यही वजह हैं कि वसंत ऋतु को ऋतुराज कहा जाता हैं। वही वसंत को ऋतुओं का राजा इसलिए भी कहा गया हैं क्योंकि इस ऋतु में धरती की उर्वरा शक्ति यानी की उत्पादन क्षमता अन्य ऋतुओं की अपेक्ष अधिक बढ़ जाती हैं यही कारण हैं कि भगवान कृष्ण ने गीता में स्वयं को ऋतुओं में वसंत कहा हैं वे सभी देवताओं और परम शक्तियों मे...