जन्माष्टमी


 *अनंतकोटी ब्रह्मांड नायक सच्चिदानंद सर्वेश्वर भगवान श्रीकृष्णके अवतरण दिवस (श्रीकृष्ण जन्माष्टमी) की आप सभी को बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं!*

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*जय राधेगोविंद!*


स्वमं परात्पर भगवान श्रीकृष्ण अपने जन्मके संबंध में श्रीअर्जुनजी को गीताजी में बतला रहे हैं..

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अजोऽपि सन्नव्ययात्मा भूतानामीश्वरोऽपि सन्‌ ।

    प्रकृतिं स्वामधिष्ठाय सम्भवाम्यात्ममायया ।। (गीता/4/6)


यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । 

अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्‌ ॥ (4/7)


परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्‌ ।

  धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥ (4/8)


जन्म कर्म च मे दिव्यमेवं यो वेत्ति तत्वतः।

त्यक्तवा देहं पुनर्जन्म नैति मामेति सोऽर्जुन॥ (4/9)


अर्थ--

(हे अर्जुन!) मैं अजन्मा और अविनाशीस्वरूप होते हुए भी तथा समस्त प्राणियों का ईश्वर होते हुए भी अपनी प्रकृति को अधीन करके अपनी योगमाया से प्रकट होता हूँ॥6॥


हे भारत! जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब-तब ही मैं अपने रूप को रचता हूँ अर्थात साकार रूप से लोगों के सम्मुख प्रकट होता हूँ॥7॥


साधु पुरुषों का उद्धार करने के लिए, पाप कर्म करने वालों का विनाश करने के लिए और धर्म की अच्छी तरह से स्थापना करने के लिए मैं युग-युग में प्रकट हुआ करता हूँ॥8॥


हे अर्जुन! मेरे #जन्म और #कर्म #दिव्य अर्थात #निर्मल और #अलौकिक हैं- इस प्रकार जो मनुष्य तत्व से जान लेता है, वह शरीर को त्याग कर फिर जन्म को प्राप्त नहीं होता, किन्तु मुझे ही प्राप्त होता है॥9


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