निशंक का जाना
निशंक के कार्यकाल के दौरान शिक्षा मंत्रालय ने कई महत्त्वपूर्ण पदों की भर्ती को रोके रखा। इसकी वजह से 40 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से करीब आधे विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति नहीं हो पाई। इनमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, केंद्रीय विश्वविद्यालय - हरियाणा, हैदराबाद विश्वविद्यालय प्रमुख हैं। ये विश्वविद्यालय कई महीनों से बिना कुलपतियों के काम कर रहे हैं जबकि नई शिक्षा नीति को लागू करने के विभिन्न फैसले लेने के लिए इनकी बहुत अधिक आवश्यकता है। इसी तरह पांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आइआइटी) में पूर्णकालिक निदेशक नहीं है जिनमें दिल्ली, भुवनेश्वर, पटना, इंदौर और मंडी शामिल हैं। वहीं, आठ आइआइटी बोर्ड ऑफ गर्वर्नस के अध्यक्ष के बिना ही चल रहे हैं। इनमें दिल्ली, बॉम्बे, रुड़की, गांधीनगर, मंडी, रोपड़, त्रिरुपति और गोवा शामिल हैं।
महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति को रोके रखने की वजह से एक ओर तो नई शिक्षा नीति को लागू करने में समय लग रहा है। दूसरा, कोरोना महामारी के समय लिए जाने वाले महत्त्वपूर्ण * निर्णयों को लेने में देरी हुई । इसका सबसे बड़ा उदाहरण उस समय सामने आया जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं को कराने या नहीं कराने का निर्णय लेना था। उस समय भी जब निर्णय लेने में देरी हो रही थी तो प्रधानमंत्री ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में एक महत्त्वपूर्ण बैठक का आयोजन कराया और तब जाकर परीक्षाओं का रद्द करने का फैसला हुआ ।

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