''मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्"
मननशील बनो और दिव्य संतानों का निर्माण करो
भारतीय संस्कृति पर्वों एवं त्योहारों की संस्कृति है । इनका उद्देश्य मानवीय संबंधों का विकास एवं उदात्त भावनाओं की सार्थक अभिव्यक्ति है । इन पर्वों में श्रावणी या रक्षाबंधन का महत्वपूर्ण स्थान है । वैदिक युग से प्रचलित यह पर्व शिक्षा, स्वास्थ्य, सौंदर्य तथा सांस्कृतिक मूल्यों की स्थापना एवं पुनर्स्मरण कराता है । इसे प्रायश्चित एवं जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए संकल्प पर्व के रूप में मनाया जाता है । यही जीवन की सुख एवं समृद्ध का आधार है ।पौराणिक युग, मध्यकाल और वर्तमान समय में रक्षाबंधन विभिन्न रूपों में दिखाई देता है, परंतु इसकी निरंतरता एवं भावना में कहीं व्यक्तिक्रम नहीं हुआ है । हाँ, कुछ विसंगतियाँ ज़रूर आयी है । समाज के बदलते प्रतिमान व परिवेश के बावजूद आज भी प्रेम की मिठास से सराबोर यह पर्व जीवन की पवित्रता और रक्षा का प्रतीक बना हुआ है ।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें