अध्यापक शिक्षा का भारतीयकरण प्रस्तावना भारत में शिक्षा, भारत की महान सांस्कृतिक परम्परा और सभ्यता का दर्पण है। यह हमारी भव्य विकसित सभ्यता का साक्षात प्रमाण भी है। यही कारण है कि, भारतीय समाज के विकास और उसमें होने वाले परिवर्तनों की रूपरेखा में हम शिक्षा और उसकी भूमिका को निरंतर विकासशील पाते हैं। भारत की शैक्षिक एवं सांस्कृतिक परम्परा विश्व इतिहास में प्राचीनतम है। प्राचीन काल में शिक्षा को अत्यधिक महत्व दिया गया था। भारत ‘विश्वगुरु’ की उपाधि से विभूषित था। भारत की प्राचीन शिक्षा, आध्यात्मिकता पर आधारित पद्धति थी। शिक्षा, मुक्ति एवं आत्मबोध का ज्ञान-उपार्जन करने का साधन थी। प्राचीन शिक्षा की गुरुकुल प्रणाली और विद्यार्थी- शिक्षक सम्बंध- भारतीय शिक्षा में आचार्य का स्थान बड़ा ही गौरव का था। उनका बड़ा आदर और सम्मान होता था। अध्यापक, छात्रों का चरित्र निर्माण, उनके लिए भोजनवस्त्र का प्रबंध, रुग्ण छात्रों की चिकित्सा, शुश्रूषा करते थे। कुल में सम्मिलित ब्रह्मचारी मात्र को आचार्य अपने परिवार का अंग मानते थे और उनसे वैसा ही व्यवहार रखते थे। आचार्य धर्मबुद्धि से नि:शुल...