भीगा फागुन रंग में, आया जो त्यौहार लाल टेसुओं ने किया, मौसम का सिंगार अभी नहा कर आई हो, ऐसी खिलती धूप पीली चादर में निखर, दमके उसका रूप सज वासंती रंग में, हुआ बसंत विभोर बौर आम की गंध ले, उड़ी हवा चहुँ ओर *रंग बिरंगो फागुण आयो* ❤️🧡💛💚💙💜♥️
''मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्" मननशील बनो और दिव्य संतानों का निर्माण करो