ज्ञानवापी

 ॥ '#ज्ञानवापी’ (ज्ञान का कुआँ)॥



मूल श्रीकाशीविश्वनाथ मन्दिर परिसर, #वाराणसी में अष्टकोणीय ‘ज्ञानवापी’ (ज्ञान का कुआँ) ठीक उसी प्रकार अवस्थित है जिस प्रकार मक्का के ‘मक्केश्वर महादेव मन्दिर’ (सम्प्रति ‘अल्-मस्जिद-अल्-हरम’) परिसर में ‘गंगाजलम्’ (‘जमजम’) अवस्थित है। शिवलिंग पर जलाभिषेक हेतु शिवालय में कुएँ की व्यवस्था, प्राचीन वैदिक परम्परा है।



कहने की आवश्यकता नहीं कि ‘ज्ञानवापी' का जल श्रीकाशीविश्वनाथजी पर चढ़ाया जाता था। ब्रिटिश लाइब्रेरी, लन्दन; लाइब्रेरी ऑफ़ काँग्रेस, वाशिंगटन; जे. पॉल गेट्टी म्यूज़ियम, कैलिफोर्निया, इत्यादि में विदेशी फ़ोटोग्राफ़रों द्वारा सन् 1859 से 1910 के मध्य लिए गए ज्ञानवापी के अनेक चित्र संगृहीत हैं जिनको देखकर रोमांच हो उठता है।



इन फ़ोटोग्राफ़रों में फेलिस बीटो (1832-1909), सैम्युअल बर्न (1834-1912), विलियम हैरी जैक्सन (1843-1942), आदि प्रमुख हैं। इन चित्रों में विभिन्न कोणों से ज्ञानवापी, उसके आसपास अवस्थित #नन्दी और गणपति आदि की प्रतिमाओं का अवलोकन किया जा सकता है।














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