निंदा में जो रस है वह अतुल्य है। स्तुति में अहंकार की अतुल्य पुष्टि होती है। निंदा दूसरों की। स्तुति अपनी। यही संसार है। लक्ष्मण ने राम से पूंछा कि माया क्या है। राम जी ने एक लाइन वाला उत्तर दिया: मैं और मोर तोर तै माया। मैं और मेरा - इसकी स्तुति। तै और तेरा - इसकी निंदा। सारा संसार के इसी के इर्द गिर्द घूमता है। सारा जीवन इसी के चारों तरफ घूमता है।

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