सुभाषितानि

अथर्ववेद








10/6/33


यथा॒ बीज॑मु॒र्वरा॑यां कृ॒ष्टे फाले॑न॒ रोह॑ति। 

ए॒वा मयि॑ प्र॒जा प॒शवोऽन्न॑मन्नं॒ वि रो॑हतु ॥


भावार्थ : -- यह बात प्रसिद्ध है कि उत्तम अन्न उपजाऊ धरती में क्रियाविशेष द्वारा बोये बीज से उत्तम अन्न आदि उत्पन्न होते हैं, वैसे ही सुशिक्षित गुणी पुरुषों के सुविचारित कर्म के सानिध्य से बड़े-बड़े उपकारी लाभ होते हैं और समाज उससे लाभान्वित हो होता है ॥३३॥

                                       

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🚩आपका दिन मंगलमय हो 🚩

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