गलतियों की स्वीकारोक्ति और सीख
*गलतियों की स्वीकारोक्ति एवं सीख*
जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश नहीं की । भीड़ हमेशा उस रास्ते पर चलती है जो रास्ता आसान लगता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं की भीड़ हमेशा सही रास्ते पर चलती है। अपने रास्ते खुद चुनिए क्योंकि आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता।
कहते हैं इंसान गलतियों का पुतला होता है। जीवन में गलतियां होना स्वाभाविक है, गलतियां करना सीखने की प्रक्रिया का एक अनिवार्य हिस्सा है। मैनेजमेंट की भाषा में इसे ही ट्रायल एंड एरर मैथेड कहते हैं। गलतियां समस्या तब बन जाती हैं जब हम गलतियों से कोई सबक न लेकर अपनी गलतियों को जस्टिफाई करने की कोशिश करने लगते हैं एवं दूसरों से उन्हें छिपाने के क्रम में और गलतियां करते चले जाते हैं।
इतिहास में विफलता से सफलता पाने के कई उदाहरण हैं। युद्ध हो या आविष्कार हर क्षेत्र में सैकड़ों लोगों को शुरुआत में विफलता का सामना करना पड़ा है लेकिन जिन लोगों ने अपनी गलती को स्वीकार किया और उसमें सुधार की संभावनाओं पर आत्ममंथन किया वह बाद में सफल हुआ और जिन्होंने गलती को स्वीकार ही नहीं किया वह इसे बार-बार दोहराता रहा और अंतत: उसके हाथ विफलता ही लगी। इसलिए गलती को सुधारने की शुरुआत स्वीकृति के साथ करें।
जैसे ही आप इसे स्वीकार करेंगे, इसके सुधार की संभावनाओं पर विचार करने के लिए आपका मस्तिष्क व्याकुल हो जाएगा और यही सुधार की शुरुआत है। जब शुरुआत हो जाएगा तो आप इसे फिर से न करने की संभावनाओं को तलाशना शुरू करेंगे और अंतत: इसे जड़ से मिटा देंगे ताकि फिर से विफलता की कहानी को दोहराया न जाए। स्वीकार करने की प्रवृति को विकसित करें ताकि आगे बढऩे की राह आसान हो और गलती का दोहराव न हो।
दुनिया का हर व्यक्ति गलती करता है,गलती करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। गलत को सही साबित करने की प्रवृति न विकसित करें। यह प्रवृति सुधार की संभावना खत्म कर देता है।गलती को स्वीकार करते ही सुधार के लिए व्याकुलता बढ़ती है, स्वीकारोक्ति से सुधार की संभावनाओं को बल मिलता है।
क्या आपने जीवन में कुछ गलतियां की हैं? यदि की हैं तो अपने जीवन से उन्हें मिटाने की कोशिश मत कीजिए बस उन्हें काटिये और आगे बढ़िये।
जब आप अपनी गलतियों को कवर करने का प्रयास करते हैं तब आप दूसरी गलती करते हैं और उस गलती को छिपाने के क्रम में तीसरी गलती इस प्रकार हम गलतियां करते चले जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप हम स्वयं को दूसरों की नजरों में और अधिक एक्सपोज और बेनकाब करते चले जाते हैं।
गलतियां करना उतना बुरा नहीं है जितना कि उनसे सबक न लेकर उन्हें दोहराते रहना है। यह भी सत्य है कि गलतियां भी आपको सही दिशा दिखातीं हैं। हर गलती एक अवसर होती है सुधार का। यह बात समझने की है कि मंजिलें कभी-कभी रास्ते बदलने से नहीं बल्कि तरीके बदलने से मिल जाती है।
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