''मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्"
मननशील बनो और दिव्य संतानों का निर्माण करो
*कानाफूसी कर रही, सखियां राधे संग* *ऋतु प्रीत को फाल्गुन आयो, कहां से लाएं रंग* *कहां से लाएं रंग, राधिका हंस कर बोली* *भौर भरे रवि किरण बिखेरे, पीत प्रसून की डोली* *चन्दन सुगन्ध से सराबोर हो, केसरिया केसर में घोली* *लाल गुलाबी गुलाब से लेकर उसमें घोलो रोली* *नीला नीला गगन से ले लो, हरा लता से बोली* *"दास"कहें तुम सुन लो राधे, कृष्ण करें ठिठोली* *भर पिचकारी कचनार रंग से भिगो न दे कहीं चोली* *राधे-राधे*
अति सुंदर पंक्तिया गुरुजी.👌👌
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