*होरी है...........* पुंडरीक ऐसो खेल रचावै। होरी में, ऐसो खेल रचावै। चीर पूरन आयो मुरारी सों , कारो चीर छुडावै। पुंडरीक ऐसो खेल रचावै। होरी में, ऐसो खेल रचावै। * उर पैठ्यों कारो कन्हाई, गोरी बात न भावै! कारो कारो डीठ्यों, ज्यों त्यों, लूंटन दोडौ जावै। पुंडरीक ऐसो खेल रचावै। होरी में, ऐसो खेल रचावै। * उकसावे करी भरी भरी बातें, चाशनी शबद मिलावै। खुद को बाल कहावतो छोटो, मोटो माल छड़ावै!! पुंडरीक ऐसो खेल रचावै। होरी में, ऐसो खेल रचावै। * ज्यों लुगाई बरसाने की, थिरक थिरक यों नाचे। बृंदावन की प्रेम अटरिया, मन मुरारि मुसुकावै। पुंडरीक ऐसो खेल रचावै। होरी में, ऐसो खेल रचावै। * एकौ फेंक्यों चीर, ता पर, नौ नौ बसन बिछावै, चढी होरी लठमार वाको तो, देस-देस बलि जावै। पुंडरीक ऐसो खेल रचावै। होरी में, ऐसो खेल रचावै।

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