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बुद्ध पूर्णिमा

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 बुद्ध पूर्णिमा विशेष 〰️〰️🌸🌸〰️〰️ भगवान बुध के जन्म दिवस को बुद्ध पूर्णिमा के रुप में मनाए जाने की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है. इस वर्ष बुध पूर्णिमा 16 मई 2022 को मनाई जाएगी. बुद्ध पूर्णिमा को “बुद्ध जयन्ती” और “वैसाक” और “वैशाख पूर्णिमा” नामों से भी पुकारा जाता है। बुधपूर्णिमा के शुभ अवसर पर भूमि, भवन और वाहन की खरीद के साथ ही पदभार ग्रहण करना बहुत ही शुभ माना जाता है। नए काम की शुरुआत के लिए भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। ईसा पूर्व कपिलवस्तु के महाराजा शुद्धोदन की धर्मपत्नी महारानी महामाया देवी की कोख से नेपाल की तराई के लुम्बिनी वन में जन्मे सिद्धार्थ ही आगे चलकर बुद्ध कहलाए। बुद्ध के जन्म, बोध और निर्वाण के संदर्भ में भारतीय पंचांग के वैशाख मास की पूर्णिमा की पवित्रता की प्रासंगिकता स्वयंसिद्ध है। वैसाखी पूर्णिमा पावनता की त्रयी है। इस पुनीत तिथि को ही बुद्ध का अवतरण हुआ, आत्मज्ञान अर्थात बोध हुआ और महापरिनिर्वाण हुआ। गौतम बुद्ध ने अपने उपदेशों में संतुलन की धारणा को महत्व दिया। उन्होंने इस बात पर बहुत बल दिया कि भोग की अति से बचना जितना आवश्यक है उतना ही योग की अत...

नंदी

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 क्या नंदी के बिना अधूरे हैं भगवान शिव? भगवान शिव और नंदी के बीच एक गहरा रिश्ता है.। शायद इसलिए नंदी हमेशा भगवान शिव की प्रतिमा के सामने विराजते हैं. वो न सिर्फ भगवान शिव के वाहन हैं बल्कि शिव के गणों में सबसे श्रेष्ठ भी हैं.। कहा जाता है कि सभी भक्तों की आवाज़ को नंदी ही शिव तक पहुंचाते हैं. नंदी की प्रार्थना को भगवान शिव कभी अनसुनी नहीं करते, इसलिए भक्तों की हर मनोकामना नंदी की बदौलत जल्दी पूरी हो जाती है.। भगवान शिव और नंदी के इस घनिष्ठ संबंध को देखकर मन में यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या भोलेनाथ नंदी के बिना अधूरे हैं? आज हम आपको बताते हैं कि नंदी भगवान शिव के सारे गणों में सबसे श्रेष्ठ और अच्छे दोस्त कैसे बने? और नंदी शिव को इतने प्यारे क्यों हैं? शिव और नंदी की कहानी – शिलाद ऋषि के पुत्र थे नंदी। पुराणों में प्रचलित एक कहानी के मुताबिक ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करनेवाले शिलाद ऋषि को अपने वंश को आगे बढ़ाने की चिंता सताने लगी थी. वंश को आगे बढ़ाने के लिए वे एक पुत्र को गोद लेना चाहते थे. इसी कामना से उन्होने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी आराधना शुरू की.। शिव की कृपा से मि...

ज्ञानवापी

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 ॥ '#ज्ञानवापी’ (ज्ञान का कुआँ)॥ मूल श्रीकाशीविश्वनाथ मन्दिर परिसर, #वाराणसी में अष्टकोणीय ‘ज्ञानवापी’ (ज्ञान का कुआँ) ठीक उसी प्रकार अवस्थित है जिस प्रकार मक्का के ‘मक्केश्वर महादेव मन्दिर’ (सम्प्रति ‘अल्-मस्जिद-अल्-हरम’) परिसर में ‘गंगाजलम्’ (‘जमजम’) अवस्थित है। शिवलिंग पर जलाभिषेक हेतु शिवालय में कुएँ की व्यवस्था, प्राचीन वैदिक परम्परा है। कहने की आवश्यकता नहीं कि ‘ज्ञानवापी' का जल श्रीकाशीविश्वनाथजी पर चढ़ाया जाता था। ब्रिटिश लाइब्रेरी, लन्दन; लाइब्रेरी ऑफ़ काँग्रेस, वाशिंगटन; जे. पॉल गेट्टी म्यूज़ियम, कैलिफोर्निया, इत्यादि में विदेशी फ़ोटोग्राफ़रों द्वारा सन् 1859 से 1910 के मध्य लिए गए ज्ञानवापी के अनेक चित्र संगृहीत हैं जिनको देखकर रोमांच हो उठता है। इन फ़ोटोग्राफ़रों में फेलिस बीटो (1832-1909), सैम्युअल बर्न (1834-1912), विलियम हैरी जैक्सन (1843-1942), आदि प्रमुख हैं। इन चित्रों में विभिन्न कोणों से ज्ञानवापी, उसके आसपास अवस्थित #नन्दी और गणपति आदि की प्रतिमाओं का अवलोकन किया जा सकता है।

हमारे राम

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 🙏🌹 *हमारे राम* 🌹🙏 *राम* शब्द में दो अर्थ व्यंजित हैं। सुखद होना और ठहर जाना। अपने मार्ग से भटका हुआ कोई क्लांत पथिक किसी सुरम्य स्थान को देखकर ठहर जाता है। हमने सुखद ठहराव का अर्थ देने वाले जितने भी शब्द गढ़े, सभी में राम अंतर्निहित है, यथा  आराम, विराम, विश्राम, अभिराम, उपराम  जो रमने के लिए विवश कर दे, वह *राम* जीवन की आपाधापी में पड़ा अशांत मन जिस आनंददायक गंतव्य की सतत तलाश में है, वह गंतव्य है *राम* भारतीय मन हर स्थिति में *राम* को साक्षी बनाने का आदी है। दुःख में *हे राम*, पीड़ा में *ऐ राम*, लज्जा में *हाय राम*, अशुभ में *अरे राम राम*,  अभिवादन में *राम राम*, शपथ में *रामदुहाई*, अज्ञानता में *राम जाने*, अनिश्चितता में *राम भरोसे*, अचूकता के लिए *रामबाण*, मृत्यु के लिए *रामनाम सत्य*, सुशासन के लिए *रामराज्य* जैसी अभिव्यक्तियां पग-पग पर *राम* को साथ खड़ा करतीं हैं। *राम* भी इतने सरल हैं कि हर जगह खड़े हो जाते हैं। हर भारतीय उन पर अपना अधिकार मानता है। जिसका कोई नहीं उसके लिए राम हैं- *निर्बल के बल राम*। असंख्य बार देखी सुनी पढ़ी जा चुकी *रामकथा* का आकर्षण कभ...

स्वयं को पहचानें

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 🪴🌺🪴🌺🪴🌺🪴🌺 *" स्वयं को पहचानें "*  *क्या आपने कभी ये विचार किया कि इस दुनिया में आपकी तकदीर कौन और कैसे बदल सकता है..? कौन है जो आपके चेहरे पर मुस्कुराहट ला सकता है..? कौन है जो आपके जीवन को सुखी और आनंदमय बना सकता है और कौन है वो जो आपकी हर समस्या का हल ढूँढ सकता है एवं आपके जीवन को एक आदर्श जीवन बना सकता है..?* *कभी आपके सामने ये समस्त प्रश्न उपस्थित हो जायें तो धीरे से उठकर आइने के सामने चले जाना आपको स्वतः इन सभी प्रश्नों का उत्तर प्राप्त हो जायेगा।।* *इस पूरी दुनिया में केवल एक ही इन्सान आपकी तकदीर बदल सकता है। इस पूरी दुनियाँ में केवल एक शख्स ही आपके हर प्रश्न का उत्तर और हर समस्या का समाधान निकाल सकता है और वो है केवल और केवल आप।।* *दूसरे आपको केवल सलाह दे सकते हैं, मार्ग दिखा सकते हैं मगर उस पर चलना आपके स्वयं के हाथों में ही है।।* 

बीएड प्रवेश 2022

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बीएड प्रवेश परीक्षा 2022 15 अप्रैल को जारी होगा विज्ञापन, 1 से 7 जुलाई के बीच होगी प्रवेश परीक्षा, 5 अगस्त को घोषित होगा परीक्षा परिणाम। शुल्क की दरें.. सामान्य/पिछड़ी- ₹1000/ SC/ST- ₹500/

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु

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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अन्तर्गत संचालित बी०ए०, बी०एस०सी०, बी०काम० एवं बी०सी०ए० प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं कल दिनांक 26 मार्च दिन शनिवार से शुरू हो रही हैं। विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम- 2022 विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.suksn.edu.in पर देखा जा सकता है ।