*अधर्म की हजार भुजाओं (सहस्रबाहु) को काटने के लिए धर्म रुपी भगवान राम परुश धारण कर परशुराम बन जाते हैं, तो वह शुभलग्न अक्षय_तृतीया बन जाता है, जगत उद्धार हेतु पतित पावनी माता गंगा धरा का स्पर्श करती है तो वह शुभ मुहूर्त अक्षय_तृतीया बन जाता है, द्रोपदी रुपी नारीशक्ति के अस्तित्व को बचाने के लिए जब श्रीकृष्ण चीर का रुप धारण करते हैं तो वह पल अक्षय_तृतीया हो जाता है, आप सभी सनातन धर्म प्रेमियों अक्षय_तृतीया की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ।।* *जय शंकर की*

 *अधर्म की हजार भुजाओं (सहस्रबाहु) को काटने के लिए धर्म रुपी भगवान राम परुश धारण कर परशुराम बन जाते हैं, तो वह शुभलग्न अक्षय_तृतीया बन जाता है, जगत उद्धार हेतु पतित पावनी माता गंगा धरा का स्पर्श करती है तो वह शुभ मुहूर्त अक्षय_तृतीया बन जाता है, द्रोपदी रुपी नारीशक्ति के अस्तित्व को बचाने के लिए जब श्रीकृष्ण चीर का रुप धारण करते हैं तो वह पल अक्षय_तृतीया हो जाता है, आप सभी सनातन धर्म प्रेमियों अक्षय_तृतीया की बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ।।*


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