''मनुर्भव जनया दैव्यं जनम्"
मननशील बनो और दिव्य संतानों का निर्माण करो
मेरे प्यारे बाबा जी!! आज पृथ्वी दिवस पर उनकी कालजयी स्मृति को हृदयंगम करते हुए भगवान आदित्य (सूर्यदेव) एवं माँ वसुंधरे (पृथ्वी माता) के प्रति उनकी अनन्य भक्ति को भी सहर्ष प्रणाम करता हूँ। हमारे बाबा जी स्वर्गीय पंडित नागेंद्र नाथ पाण्डेय जी के दिनचर्या की शुरुआत प्रातः "माँ वसुंधरे तुझे कोटि कोटि प्रणाम है...." से शुरू होती थी। अपनी धरा के संरक्षण की दिशा में उनके एक-एक शब्द हमारे लिए आज आदर्श वाक्य हैं।
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