संदेश

सिद्धार्थ विश्वविद्यालय, कपिलवस्तु

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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अन्तर्गत संचालित बी०ए०, बी०एस०सी०, बी०काम० एवं बी०सी०ए० प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं कल दिनांक 26 मार्च दिन शनिवार से शुरू हो रही हैं। विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम- 2022 विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.suksn.edu.in पर देखा जा सकता है ।

नई शिक्षा नीति (NEP 2020)

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अब शिक्षा पर  जी डी पी का 6%खर्च होगा जो 1986 से ही कहा जा रहा है किन्तु अभी तक 4% भी खर्च नहीं हुआ। शिक्षा व्यवस्था कुछ बेहतर हो सकता है यदि ईमानदारी से इन सुधारों को लागू किया जाए।

UGC Regulation 2022

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भगवान शंकर

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परमेश्वर शिव त्रिकाल दृष्टा, त्रिनेत्र, आशुतोष, अवढरदानी, जगतपिता आदि अनेक नामों से जानें जाते हैं। महाप्रलय के समय शिव ही अपने तीसरे नेत्र से सृष्टि का संहार करते हैं परंतु जगतपिता हो कर भी शिव परम सरल व शीघ्रता से प्रसन्न होने वाले हैं। संसार की सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाले शिव को स्वयं के लिए न ऐश्वर्य की आवश्यकता है न अन्य पदार्थों की। वे तो प्रकृति के मध्य ही निवासते हैं। कन्दमूल ही जिन्हें प्रिय हैं व जो मात्र जल से ही प्रसन्न हो जाते हैं। जहां अन्य देवों को प्रसन्न करने हेतु कठिन अनुष्ठान किया जाता है वहीं शिव मात्र जलाभिषेक से ही प्रसन्न होते हैं। शिव का स्वरूप स्वयं में अद्भुत तथा रहस्यमय हैं। चाहे उनके शिखर पर चंद्रमा हो या उनके गले की सर्प माला हो या मृग छाला हो, हर वस्तु जो भगवान शंकर ने धारण कर रखी है, उसके पीछे गूढ़ रहस्य है। शास्त्रनुसार सभी देवताओं की दो आंखें हैं पर शिव के तीन नेत्र हैं। इस लेख के माध्यम से हम अपने पाठकों को बताते हैं क्यों हैं शिव के तीन नेत्र तथा इसके पीछे क्या रहस्य है। *त्वं ब्रह्मा सृष्टिकर्ता च त्वं विष्णुः परिपालकः। *त्वं शिवः शिवदोऽनन्तः सर्वस...

होली का वास्तविक स्वरूप

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*होली का वास्तविक स्वरूप क्या है?* पांखड अंधविश्वास को छोड़कर इसकी वैज्ञानिकता समझें। इस पर्व का प्राचीनतम नाम वासन्ती नव सस्येष्टि है अर्थात् बसन्त ऋतु के नये अनाजों से किया हुआ यज्ञ, परन्तु होली होलक का अपभ्रंश है। यथा :- तृणाग्निं भ्रष्टार्थ पक्वशमी धान्य होलक: (शब्द कल्पद्रुम कोष)  अर्धपक्वशमी धान्यैस्तृण भ्रष्टैश्च होलक: होलकोऽल्पानिलो मेद: कफ दोष श्रमापह।(भाव प्रकाश) अर्थात् :- 1- तिनके की अग्नि में भुने हुए (अधपके) शमो-धान्य (फली वाले अन्न) को होलक कहते हैं।  यह होलक वात-पित्त-कफ तथा श्रम के दोषों का शमन करता है। 2- होलिका―किसी भी अनाज के ऊपरी पर्त को होलिका कहते हैं-जैसे-चने का पट पर (पर्त) मटर का पट पर (पर्त), गेहूँ, जौ का गिद्दी से ऊपर वाला पर्त। इसी प्रकार चना, मटर, गेहूँ, जौ की गिदी को प्रह्लाद कहते हैं। होलिका को माता इसलिए कहते है कि वह चनादि का निर्माण करती (माता निर्माता भवति) यदि यह पर्त पर (होलिका) न हो तो चना, मटर रुपी प्रह्लाद का जन्म नहीं हो सकता।  जब चना, मटर, गेहूँ व जौ भुनते हैं तो वह पट पर या गेहूँ, जौ की ऊपरी खोल पहले जलता है, इस प्रकार प्रह्लाद ब...

यूपी बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम सत्र 2021-22

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शिव विवाह

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महाशिवरात्रि के दिन शिव विवाह कि अद्भुत कथा!!!!!! तुलसीदास जी ने जिस तरह से शिव जी के विवाह का वर्णन किया है ऐसा विवाह न हुआ है न होगा!  शिवजी आज दुल्हा बने है शिव जी के गण आज शिव जी का श्रृंगार कर रहे है ! जटाओं का मुकुट उस पर सांपो का मौर बना है सांपो का ही कानों में कुंडल है , मस्तक पर चंद्रमा , सांपो का ही जनेऊ धारण किए हुए हैं , तन पर भभूती लगाए हुए हैं....देवाधिदेव शिव जी कि विचित्र बरात जब दुल्हा ही ऐसा है तो बराती कैसे होगे ??  तन छार ब्याल कपाल भूषन नगन जटिल भयंकरा। सँग भूत प्रेत पिसाच जोगिनि बिकट मुख रजनीचरा।। जो जिअत रहिहि बरात देखत पुन्य बड़ तेहि कर सही। देखिहि सो उमा बिबाहु घर घर बात असि लरिकन्ह कही।  अर्थात्–’दूल्हा भगवान शिव के शरीर पर राख (भस्म) लगी है, साँप और कपाल के गहने हैं, वह नंगे, जटाधारी और भयंकर हैं। उनके साथ भयानक मुखवाले भूत, प्रेत, पिशाच, योगिनियां और राक्षस हैं। जो बारात को देखकर जिन्दा बचेगा, सचमुच उसके बड़े ही पुण्य हैं और वही पार्वती का विवाह देखेगा। लड़कों ने घर-घर जाकर यह बात कही।’ सप्तर्षियों द्वारा पर्वतराज हिमाल...